Sawan Somvar 2022 | सावन सोमवार व्रत की कथा पूजा विधि, सामग्री एवं महत्व

सावन सोमवार 2022:-पंच तत्व से ऊपर एक तत्व है जो आत्मा है। जिसके होने से ही ये तत्व अपना काम करते है।ओर शरीर मे ऊर्जा शक्ति व इन तत्वों को ॐ नियंत्रण में रख सकता है ।लेकिन ॐ के द्वारा हर व्यक्ति इन पञ्च तत्वों को एक साथ संतुलन में नही कर सकता इसलिए सबसे पहले हमको इन तत्वों का संतुलन करना आवश्यक होता है वरना भटक जाओगे ओर तत्वों को गलती से असंतुलन कर दिया तो परिणाम भी गम्भीर भुगत सकते हो।
मनुस्य का शरीर तन्त्रो पर खड़ा है विभिन्न प्रकार के उत्तक से मिलकर अंगों का निर्माण हुआ है जो कि अलग शरीर तंत्र में मुख्य 4 है ।

  1. मस्तिक

2. प्रमस्तिक

3. मेरुदण्ड

4. तंत्रिकाओं का पुंज

इसके अलावा कई और तंत्र है जैसे स्वशन तंत्र,पाचन तंत्र, ज्ञानेन्द्रिय तंत्र,जननांग तंत्र आदि आदि आदि।
इन सभी तत्वों को समझ कर हम तत्वों को कुछ प्रयोग के द्वारा संतुलन में कर सकते है जिससे हमारे आगे की यात्रा बढ़ सके।

इसके लिए आषाढ मास और शिव पूजन का महत्व है।

आषाढ़ का महीना समाप्त होने के बाद श्रावण का महीना आरंभ होता है. श्रावण के महीने को ही सावन का महीना कहा जाता है. हिंदू कैंलेडर के अनुसार आषाढ़ मास को चौथा और सावन के महीने को पांचवां मास माना गया है. पूजा पाठ के लिए सावन का महीना सबसे उत्तम महीनों में से एक माना गया ।आषाढ़ मास का समापन 24 जुलाई 2022 को पूर्णिमा की तिथि को होने जा रहा है. इस पूर्णिमा की तिथि को आषाढ़ी पूर्णिमा भी कहा जाता है. श्रावण मास शुरूआत 25 जुलाई 2022 से होगा.

कर्क संक्रांति

छह महीने के उत्तरायण काल का अंत माना जाता है। साथ ही इस दिन से दक्षिणायन की शुरुआत होती है, जो मकर संक्रांति में समाप्त होता है।
आषाढ़ मास तक रहता है। दक्षिणायन का काल देवताओं की रात्रि मानी गई है विष्णु जी का शयन दक्षिणायन को नकारात्मकता का और उत्तरायण को सकारात्मकता का दक्षिणायन व्रत, साधना एवं ध्यान का ।जिसके देव शिव है जो पितरो के लिए विशेष महत्व है।

सावन सोमवार 2022

सावन के सभी सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है. लेकिन पहले और अंतिम सोमवार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. सोमवार के व्रत में विधि और अनुशासन का ध्यान रखना चाहिए. तभी व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है.
सावन सोमवार व्रत-जो पूर्णिमा से सावन महिने की शुरूआत करते हैं )परन्तु शिव वास श्मशान, सभा अथवा क्रीड़ा में हो तो उन तिथियों में शिवार्चन करने से महा विपत्ति, संतान कष्ट व पीड़ादायक होता है।”

ये भी पढ़े-आज का राहु काल का समय

रुद्राभिषेक करने की तिथियां-
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, पंचमी, अष्टमी, एकादशी, द्वादशी, अमावस्या, शुक्लपक्ष की द्वितीया, पंचमी, षष्ठी, नवमी, द्वादशी, त्रयोदशी तिथियों में अभिषेक करने से सुख-समृद्धि संतान प्राप्ति एवं ऐश्वर्य प्राप्त होता है।

कालसर्प योग, गृहकलेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यो की बाधाओं को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है।
इसके अतिरिक्त ज्योर्तिलिंग-क्षेत्र एवं तीर्थस्थान में तथा शिवरात्रि-प्रदोष, श्रावण के सोमवार आदि पर्वो में शिव-वास का विचार किए बिना भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है।

पहला सावन सोमवार व्रत 18 जुलाई 2022 सावन मास तृतीया तिथि।
कृष्ण पक्ष।त्रिदेव का प्रतिनिधित्व।
पंचक, धनिष्ठा नक्षत्र धन वैभव संपन्न बनाने वाला है।शिव इस नक्षत्र के प्रमुख देवता है।
शिव वास* क्रीड़ा स्थल मे होने से कष्टदायक व दुखदायी है।
संगीत व सिनेमा,किसान,शिल्पकार वालो को इन शिव का पूजन करना चाहिए।
तमोगुण को शांत करने के लिए
ठंडे जल से अभिषेक ।
आक के फूल।
लाल चंदन का त्रिपुण्ड ।
डमरू का नाद।शिव तांडव स्रोत

दूसरा सावन सोमवार व्रत- 25 जुलाई 2022
नवमी तिथि कृष्ण पक्ष। कृतिका नक्षत्र। शुक्र व चंद्र ग्रह की रिमेडिज।
पार्थिव शिवलिंग का निर्माण
कार्तिकेय व सूर्य का पूजन विशेष
शिव वास सभागार मे संताप
सुनार,सेना,नेतृत्व करने वाले, मेडिकल, ज्योतिषविद के लिए।
दूध से अभिषेक,आक के ,कनेर, सूर्यमुखी का फूल
चंद्र (चाँदी को )चढाये।
हवन जरूर करे।


तीसरा सावन सोमवार व्रत- 1 अगस्त 2022
शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि
शिव वास श्मशान मे मृत्युतुल्य कष्टप्रद।
अशलेषा नक्षत्र। नव नाग पाठ व नाग पूजन जरूर करे।
नाग नागिन का जोडा अर्पित करे।
साहित्य, पर्यटन, पत्रकार, दलाल,व्यापारिक, वस्त्र उद्योग,आरोग्य लाभ,वालो के लिए विशेष।
मूग॔ का दान।
मीठे दूध से अभिषेक
बुध व चंद्र की रिमेडिज


चौथा सावन सोमवार व्रत- 08 अगस्त 2022
शुक्लपक्ष अष्टमी
शिव वास श्मशान मे मृत्य कष्ट
महामृत्युंजय का जप।
शनि व केतु व मंगल की रिमेडिज
अनुराधा नक्षत्र
संतुलन बनाने,प्राकृतिक कार्य के लिए, वैज्ञानिक अनुसंधान उद्योग के विकास।
काले तिल व सप्तआनाज चढाये।
नीले पुष्प शंख पुष्पी।
काला आक का फूल।
बेलफल।
हरिहर का भजन।
सावन के महीने भगवान शिव की विशेष उपसाना की जाती है. इस मास में शास्त्रों का अध्ययन करना, पवित्र ग्रंथों को सुनना अत्यंत शुभ बताया गया है. धर्मिक कार्यों को करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है. मन और चित्त दोनों शांत होते है।

दान करें : इस माह में 5 तरह का दान करें।

  1. अन्नदान : किसी गरीब को, पशु या पक्षी को भोजन कराएं,

2. दीपदान : नदी के जल में दीप छोड़े या मंदिर में दीप जलाएं।

3. वस्त्रदान : किसी गरीब को वस्त्र का दान करें।

4. छायादान : कटोरी में सरसों के तेल में अपनी चेहरा देखकर उसे शनिमंदिर में दान कर दें।

5. श्रमदान : किसी मंदिर या आश्रम में सेवा करके श्रमदान दे सकते हैं।


सावन में किस प्रकार करें शिव :-

श्रावण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सोमवार का व्रत है। सोमवार का व्रत पूर्ण रूप से शिव को समर्पित है। जुड़ी कहानी यह है कि समुद्र मंथन के बाद समुद्र से कई कीमती रत्न निकले विष धारण के परिणामस्वरूप शिव का कंठ नीला हो गया (विष के साथ) और उन्हें मोनिकर, नीलकंठ (नीले गले वाला) मिला। भक्त पूरे एक महीने शिव को समर्पित करते हैं। व्रत के कई फायदे हैं। जिन लोगों के बारे में कहा जाता है कि वे अपने वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना कर रहे हैं या जो विवाह में देरी का सामना कर रहे हैं, वे सोमवार का व्रत कर सकते हैं।

यह व्रत ज्यादातर महिलाएं अच्छा पति पाने के लिए करती हैं। बलारिष्ट योग या बच्चो की आयु दीर्घ करने के लिए सोलह सोमवार व्रत, जिसका अर्थ है 16 उपवास सोमवार, का पाठ करने से शिव प्रसन्न होते । पार्वती ने शिव से विवाह करने के लिए सोलह सोमवार व्रत रखा था। इस उपवास अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) से दूर रहने की जरूरत है और केवल अच्छे कर्म करने चाहिए।

श्रावण में भगवान शिव की पूजा और सावधानी:-

श्रावण के सोमवार को लोगों को सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखने की सलाह दी जाती है। यद्यपि कोई व्यक्ति दूध से शिवलिंग का अभिषेक कर सकता है, उपवास करने वाले भक्तों को दूध नहीं पीना चाहिए।
श्रावण के दौरान लोगों को शराब नहीं पीनी चाहिए और मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए। भक्तों को बैंगन या बैंगन खाने से भी बचना चाहिए क्योंकि पुराणों के अनुसार इसे अशुद्ध माना जाता है।
भक्तों को भगवान शिव(shiv) की पूजा के बाद सोमवार व्रत कथा (vrat katha )सुनने की भी सलाह दी जाती है।
श्रावण मास में सोमवार के दिन भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए।

श्रावण मास के दौरान भक्तों को भी संयम का अभ्यास करना चाहिए और ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना चाहिए।भक्तों को यह भी सलाह दी जाती है कि अभिषेक करते समय हल्दी या हल्दी का प्रयोग न करें।
घर में सकारात्मक वातावरण फैलाने के लिए, भक्तों को गंगा जल छिड़कने या देवी पार्वती और भगवान नंदी को दूध चढ़ाने की भी सलाह दी जाती है।

भगवान शिव की पूजा करते समय आपको उन्हें बेल पत्र या बेल पत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत या चावल अर्पित करना चाहिए।सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों मंत्र गोदुग्ध से विशेष रूप से अभिषेक किया जाता है ।

विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सब को मिला कर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है।
अंजना ज्योतिषविद।

2 thoughts on “Sawan Somvar 2022 | सावन सोमवार व्रत की कथा पूजा विधि, सामग्री एवं महत्व”

Leave a Comment