रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान- जान लो नही तो पछताओगे

रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान-दोस्तों, आजकल आपने कई लोगो को रुद्राक्ष पहनें देखा होगा, मानो की वो बहुत शिवभक्त है किंतु यह उनका मात्र एक फैशन बन चुका है। और आपको पता होगा की रुद्राक्ष भगवान शिव ही है, और फिर शिव जी को एक फैशन बनाना कितनी तुक्ष्य बात होगी। ऐसा करना कदापि गलत है। ऐसी स्थिति में काफी नुकसान भी हो सकता है। 

जी हां, रुद्राक्ष पहनना गलत नही है बल्कि रुद्राक्ष पहनने से लाभ होता है किंतु अगर हम रुद्राक्ष को गलत तरीके से पहनते है तो हमको इसका गलत असर देखने के अवश्य मिलेगा। इसीलिए आज हम आपको अपने लेख के माध्यम से रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान और रुद्राक्ष पहनने का सही तरीके के बारे में बताऊंगा !

रुद्राक्ष क्या होता है ?

रुद्राक्ष शिव भक्तों के लिए वरदान सा है क्योंकि रुद्राक्ष मानो तो स्वयं शिव जी है, रुद्राक्ष को शिव जी का ही एक अंश माना जाता है। रुद्राक्ष शब्द को ब्रह्मा जी द्वारा रचित संस्कृत से लिया गया एक अद्भुत शब्द है।

रुद्राक्ष का अर्थ क्या होता है ?

रुद्राक्ष को शिव जी का ही एक अंश माना जाता है आइए हम आपको इसका पूर्ण अर्थ बताते है। रुद्राक्ष दो शब्दो से मिलकर बना है। 

रुद्र – शिव जी 

अक्ष – नेत्र

और जब हम इन दोनो शब्दो को मिलाते है और रुद्राक्ष का अर्थ निकलते है तो इसका अर्थ शिव जी की नेत्र हुआ अर्थ रुद्राक्ष साक्षात् शिव जी की तीसरी नेत्र है।

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रुद्राक्ष की उत्पत्ति कहा से हुई ?

दोस्तों, अभी मेने आपको बताया है की रुद्राक्ष स्वयं में शिव जी है इसके पीछे की एक कथा है जिसकी वजह से मेने आपको यह कहा था, आइए हम आपको रुद्राक्ष के पीछे की कथा के बारे में बताते है।

मित्रो, बहुत समय पूर्व राजा दक्ष के यज्ञ में उनकी पुत्री सती ने अपनी देह का त्याग कर भस्म कर दी थी। मां सती के देह त्यागने के शोक में महादेव दुख के महासागर में डूब गए। और मां सती का मृतक शरीर चारो और घुमाने लगे।

अतः इसके परिणाम स्वरूप भगवान शिव विरक्त अवस्था में हो गए और समाधि में बैठ गए। इस समाधि में भगवान शिव कई वर्षों तक बैठे रहे। 

एक दिन संसार पर त्रिपुरासुर का बुरा शाया पड़ा, त्रिपुरासुर को मारने का प्रयास सभी भगवान ने लोग किंतु कोई इनका अंत न कर सका इसीलिए सभी देव भगवान शिव जी के पास गए और फिर शिव जी ने त्रिपुरासुर के विनाश के लिए अपनी आंखे खोली और फिर इनकी शोक में डूबी आंखों से आंसू गिरने लगे और फिर शिव जी जहां जहां गए वहां वहां शिव जी के आंसू गिरे और रुद्राक्ष के पेड़ के रूप में विकसित हुए।

अब आप समझ गए होंगे की मेने रुद्राक्ष को शिव जी का प्रतीक क्यों कहा और रुद्राक्ष शिव जी की तीसरी आंख के समान है यह बात आप समझ गए होंगे।

रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान ?

रुद्राक्ष पहनने का अर्थ है की साक्षात शिव जी को धारण करना और रुद्राक्ष पहनने के कई सारे लाभ होते है और इसके कई सारे प्रकार भी होते है। रुद्राक्ष 1 मुखी से लेकर 14 मुखी तक होते है। इन सबका अपना अलग प्रभाव होता है जो की अलग अलग कष्टों को हरने के लिए होते है।

आपको जानकर हैरानी होगी की रुद्राक्ष के चमत्कारों को स्वयं विज्ञान ने भी माना है। वैसे तो ये रुद्राक्ष बहुत लाभकारी होते है किंतु यह किसी इंसान के जीवन को खराब करने में भी उत्तम है क्योंकि जब तक हम इसको सही प्रकार से ग्रहण न करे तो इसके अच्छे लाभ नही मिलते है।

आइए सबसे पहले हम आपको रुद्राक्ष के फायदे और नुकसान के बारे में बताते है जिससे आपको समझ में आएगा की रुद्राक्ष कितना अहम है।

रुद्राक्ष के नुकसान ?

रुद्राक्ष पहनने के हजारों लाभ है किंतु अगर हम इसको विधि से और सही नियमों से नही पहनते है तो हमको इसके दुष्प्रभाव देखने को मिलते है। और इसके साथ साथ रुद्राक्ष आपको तब भी नुकसान पहुंचा सकता है जब आप अपने हिसाब से एक सही मुखी रुद्राक्ष का चयन नही करते है।

रुद्राक्ष को सही प्रकार से नही पहनने के निम्न नुकसान हो सकते है –

  • अगर रुद्राक्ष को सही प्रकार से न पहना जाए तो इससे मन में अस्थिरता बनी रहती है।
  • अगर रुद्राक्ष पहनने के नियमो का पालन न किए जाए तो यह किसी व्यक्ति का पथभ्रष्ट कर देता है।
  • शराब और नशा करने से रुद्राक्ष अपने गलत प्रभाव दिखाता है।

रुद्राक्ष पहनने के फायदे ?

दोस्तों, रुद्राक्ष स्वयं शिव जी का भाग है, और यही वजह है की यह हमको अनंत लाभ दे सकता है और इस पर संदेह करना बहुत गलत होगा। रुद्राक्ष के इन फायदों को विज्ञान ने खुद स्वीकार किया है। रुद्राक्ष पहनने के निम्नलिखित फायदे होते है –

  • दिमाग शांत रहता है।
  • जो व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है वह मानसिक तनाव से दूर रहता है।
  • रुद्राक्ष धारण किए हुए व्यक्ति का वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
  • ऐसे व्यक्ति का मस्तिष्क बहुत नियंत्रित रहता है।

रुद्राक्ष पहनने के नियम ?

रुद्राक्ष के लाभ को लेने के लिए आपको रुद्राक्ष को पहनने से पहले व बाद में हमको कुछ नियमो का पालन करना चाहिए जिससे हम रुद्राक्ष का पूरा लाभ ले सकते है। रुद्राक्ष को पहनने के निम्नलिखित नियम है –

  • ब्रह्मचर्य का पालन करना।
  • मांस और मदिरा से दूर रहना।
  • रुद्राक्ष को गंदे हाथो से न छूये।
  • 27 मनको से कम का रुद्राक्ष न पहने।
  • काले धागे में रुद्राक्ष न पहने।
  • पीरियड्स के दौरान स्त्री इसको न धारण करें।
  • सोमवार को रुद्राक्ष धारण करें।

निष्कर्ष:

दोस्तों, आज मेने आपको अपने लेख के माध्यम से रुद्राक्ष क्या होता है ?, रुद्राक्ष का अर्थ क्या होता है ?,रुद्राक्ष की उत्पत्ति कहा से हुई ?, और रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान ? के बारे में विस्तार से बताया है जिससे आपके मन में रुद्राक्ष से जुड़ा कोई अन्य सवाल नही रहा होगा।

रुद्राक्ष पहनकर क्या कारण गलत होता है ?

आप अगर रुद्राक्ष को धारण करते है तो ध्यान रहे की आप मांस और मदिरा से दूर रहे।

रुद्राक्ष को गले में पहने या फिर हाथो में ?

कई सारे लोग रुद्राक्ष को हाथो में पहनते है तो उनको बता दूं की आपको रुद्राक्ष को गले में ही धारण करना चाहिए जिससे रुद्राक्ष के असीम लाभ मिलते है।

रुद्राक्ष कौन कौन पहन सकता है ?

रुद्राक्ष तो सब पहन सकते है किंतु ध्यान रहे की वह व्यक्ति किसी प्रकार का नशा न करता हो।

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