आज का राहु काल का समय और राहु काल के 10 उपाय क्या है?

राहु एक अभिलाषा पाने की चाहत अगर जरूरत ₹10 की होगी तो ₹200 मांगेगा.. कभी इच्छा की समाप्ति ही न हीं होगी.. छाया ग्रह होने से यह एक सोच है एक्सप्लेन नहीं किया जा सकता है.. राहु की अपनी एक अलग सत्ता है यह खुद ही अपनी सत्ता बनाता है जहां छाया ग्रह वही राहु को अंधेरा माना है किसी कार्य का प्रारंभ राहु करता है इसे मुख्य माना गया है… विस्तार.. इच्छाओं का नशा इसलिए सूर्य आत्मा या काल को ग्रहण लगा देता है इसलिए होरा काल को भी ग्रहण लगा सकता है..

राहु काल का समय कौन सा है?

जब सूर्य का स्पेक्ट्रम से टाइम जोन जहां पर आत्मा पर ऊर्जा पुंज में उस समय केंद्रित होकर एक बिंदु रूप में एकत्रित होकर दिमाग का आज्ञा चक्र या निर्णय की स्थिति में खुद को सर्वोपरि समझकर आत्मा की बात को भी इग्नोर करता है इसलिए इस काल के समय को राहु काल राहु के सिर से कटने से जोड़ा गया है..


काल पुरुष के दोनों नेत्रों के मध्य राहु का स्थान है।जहां हम तिलक करते हैं। सूर्य व चन्द्र के मध्य सहिकेय नाम का राक्षस है, सूर्य व चन्द्र ने चुगली कर विष्णु से उसका सिर कटवा लिया व अमृतपान किया, उसको देवत्व का वरदान मिला। मृत्यु के समय भूख व लार बनना बन्द हो जाती है. राहु अंधकार है इच्छाओं का नशा है मनुष्य नित्य राहु केतु के अधिकार में रहता है। रात्रि में राहु अपना प्रभाव रखता है, दिन में केतु।
वास्तविकता में वैज्ञानिक आधार भी समझना या अध्ययन का विषय है या विसंगतियां हैं इस टाइम जोन में आठवां खंड को जोड़ा गया है…

मायावी राहु काल

राहु यह रूप बदलकर अपना चालाकी से कार्य करता है या भ्रम पैदा करता है इस तरह से अमृत पीकर / शक्तिशाली रूप में यह राहुकाल के रूप में होता है यहां होरा को भी समझना जरूरी है क्योंकि इसका महत्व राहु काल से जुड़ा हुआ है…
लोंगिट्यूड लाटीट्यूड के अनुसार अलग अलग स्थान के लिए राहुकाल बदलता रहता है..
संधि काल में इसका प्रभाव सबसे ज्यादा होता है…आंखों के मध्य संधि भाग..
किसी घर के दरवाजे राहु का पता चलता है वास्तु के अनुसार इसी तरह किसी भी कार्य की सफलता और पूर्णता में उस दिन की होरा के साथ राहुकाल को समझना जरूरी है…ये 24 घण्टे में से 90 मिनट का एक फिक्स्ड टाइम होता है।

एक अध्ययन से राहु काल को समझ सकते हैं।

राहु काल को सामान्य फार्मूले से समझ सकते हैं..

राहुकाल का आरंभ मालूम कैसे करें? उस स्थान विशेष का स्थानीय दिनमान पता करके उसके आठ बराबर भाग करें।अभीष्ट वार के गुणक से अष्टमांश को गुणा करके उसे सूर्योदय में काल से जोड़ना होगा…
फिर कितने समय तक यह राहुकाल होगा?उस दिनमान के 1/8 भाग के समय को जोड़ने पर जो समय आएगा..


इस तरह से हर * वार और स्थान का निकाला जा सकता है
रविवार को यह समय क्यों लिया गया यह समझते हैं,
रविवार के दिन शाम 4 बजकर 30 से 6 बजे तक
इस दिन सूर्य की होरा बलवान होती है.. वही राहु काल में आठवीं सूर्य की होरा होती है..
सूर्य को ग्रहण राहु लगाता है इसलिए जितने भी कार्य राज्य कार्य, पावरफुल कार्य होते हैं उन्हें करने पर राहु भ्रमित कर देता है..

राहु काल सोमवार के दिन दूसरा भाग यानि की सुबह 7 बजकर 30 मिनट से सुबह 9 बजे तक

इस दिन इस समय मंगल की होरा होती है जो कि काफी आक्रामक ओर भावुकता दोनों का समावेश किएहुएअनिश्चितता की स्थिति को माना जाता है इसलिए इस राहुकाल में किए गए कार्य को अवॉइड किया जाता है..

राहु काल मंगलवार के दिन दोपहर 3 बजे से शाम 4 बजकर 30 मिनट तक

बुध की होरा होती है मंगल बुध मंगलवार को होरा बुध की हो राहु काल हो चंचलता साहस या जल्दी करने की आदत राहु बुध का मित्र है परंतु वह किसी स्थाई कार्य को करने नहीं देगा और वहां पर दिग्भ्रमित करेगा कोई टेंडर कोई लर्निंग, नए व्यापार शुरू करना,लेखन व प्रकाशन का कार्य करना, प्रार्थना पत्र देना, विद्यारंभ करना, कोष संग्रह करना परेशानी पैदा करेंगे..

राहु काल बुधवार के दिन दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक शुक्र ओर बुध की मिश्रित होरा होगी..

इस समय शुक्र से संबंधित कार्य मैरिज, लव, ऑल वीनस realated,ऑल वर्ल्डली कंफर्ट आइटम्स आदि से संबंधित कार्य में आप किसी चालकी के शिकार हो जायगे..

राहु काल गुरुवार के दिन दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक का समय( यानि की दिन का छठा भाग राहुकाल होता है)

इस दिन चंद्र और शनि की मिक्स होरा होंगी चंद्र राहु काल में भ्रमित, भावुकता और असंतोष समावेश होगा वही शनि किसी कार्य को देरी से करेंगे .. वैसे भी राहु शनि चंद्र का योग अच्छा नहीं माना जाता.. इस समय किए गए गुरु के शुभ फल प्राप्त नहीं होंगे (इन्वेस्टमेंट अर्थव्यवस्था के )

राहु काल शुक्रवार के दिन चौथा भाग यानि की सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजे तक

इस समय शनि, मंगल, गुरु की मिश्रित होरा होगी. जो मस्तिष्क में मंथन करेंगी और आप किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंच पाएंगे..
विशेष रूप से नए वाहन, भवन, ग्लैमर आइटम्स मनोरंजन आदि के कार्यों में..

राहु काल शनिवार के दिन सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक

इस समय मंगल की होरा होने से फनी जहां पर किसी कार्य को मंद करता है वहीं पर मंगल आक्रामक रूप में होगा राहु का योग यहां पर विषमय होगा.. कोई भी कार्य करने पर क्रोध उत्पन्न होगा… नुकसान होगा…

इस तरह से राहु काल में किए गए कार्य स्वार्थी पन को, डर को, ऑर्डर देने को, कोई ऐसा कार्य आपके जीवन भर चुभ जाएगा रहस्यमय चीजों को जिससे आप निकल नहीं पाएंगे.. जालसाजी कारक, वातावरण में प्रभावी हो जाते हैं वही नेगेटिव वर्क आपके बहुत फैल जाएंगे और उन को रोकना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा …

राहु काल के विशेष उपाय:-

  1. अगर आपको लगता है कि राहु काल में कोई कार्य करना है तो उस दिन की होरा को महत्व दे दे..
  2. उस राहुकाल विशेष में आप एक विशेष माथे में तिलक लगाकर कार्य करें..
  3. उस राहुकाल में आप एक विशेष फल का दान जरूर करें अगर आपको कोई कार्य करना है..
  4. संध्या काल को बहुत ज्यादा अवॉइड करें..
  5. नीला कपड़ा पहनकर ना जाए.. आप राहुकाल को बढ़ाएंगे..
  6. किसी धार्मिक स्थल पर एक नारियल चढ़ाकर जाएं..
  7. गोमेद को जल में प्रवाहित कर दें..
  8. जब आप कोई कार्य नया कर रहे हो उस समय दक्षिण पश्चिम की ओर मुख ना रखें..
  9. अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें..
  10. ॐए मंत्र का जाप करते हुए जाए… AstroskyAnjana

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