Mrityunjaya Mantra in Hindi | महामृत्युंजय मंत्र, जानें जप विधि

Mrityunjaya Mantra:- इंसान के जीवन में कई प्रकार की कथिनाईया आती रहती हैं जो सबसे ज्यादा शारीरिक और मानसिक रूप में होती हैं.. जिसका निवारण आज के आधुनिक युग में चिकत्सा किसी भी मेडिसिन या डिवाइस से हो सकना संभव नहीं हैं हां उनसे हम अपनी बीमारियों को कुछ समय के लिए दवा तो लेते हैं पर उससे पूर्ण रूप से निजात नहीं पा सकते…अगर देखा जाए जिस तरह से हम स्वथ्य को दुरुस्त रखने के लिए दवाओ का नियमित सेवन करते हैं ठीक उसी तरह यदि हम नियमित इष्ट की पूजा या आराधना को भी दे तो उससे एक नहीं बहुत से लाभ मिलते हैं..

आज का मेरा ये लेख इसी बात पर हैं यदि हम साल में एकबार अगर महामृत्युजय की पूजा करते हैं तो निश्चय ही हमारे जीवन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं तो चलिए जान लेते हैं महामृत्युजय की पूजा के बारे में…

अब जब मैंने ये बात कहीं हैं तो आपके मन में ये प्रश्न जरूर आ रहा होगा कि क्यों करनी चाहिए महामृत्युज की पूजा….? तो मैं आपको बता दूं हमारे भारतीय वैदिक पुराण में इस मंत्र का वर्णित किया गया हैं… हालांकि तर लोग शायद कम ही जानते होंगे कि महामृत्युजय मंत्र और मृत्युजय मंत्र दोनों अलग अलग हैं तो सब से पहले इसके बारे में बताए देती हूं..

तो सबसे पहले हम मृत्युंजय मंत्र क्या है को जानेंगे

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Mrityunjaya Mantra ( मृत्युंजय मंत्र )

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् 
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

ये मृत्युजय मंत्र हैं जिसका जाप से हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते है जो अपनी शक्ति से इस संसार का पालन -पोषण करते है उनसे हम प्रार्थना करते है कि वे हमें इस जन्म -मृत्यु के बंधन से मुक्त कर दे और हमें मोक्ष प्रदान करें…

और वहीं हम महा मृत्युंजय मंत्र के शब्दों के अर्थ अर्थो को जान लेते हैं..

महामृत्युजय मंत्र

|| ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ ||

इसका अर्थ हैं

त्रयंबकम- त्रि.नेत्रों वाला ;कर्मकारक।

यजामहे- हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं। हमारे श्रद्देय।

सुगंधिम- मीठी महक वाला, सुगंधित।

पुष्टि- एक सुपोषित स्थिति, फलने वाला व्यक्ति। जीवन की परिपूर्णता

वर्धनम- वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है।

उर्वारुक- ककड़ी।

इवत्र- जैसे, इस तरह।

बंधनात्र- वास्तव में समाप्ति से अधिक लंबी है।

मृत्यु- मृत्यु से

मुक्षिया, हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें।

अमृतात- अमरता, मोक्ष।

महा मृत्युंजय मंत्र के सरल शब्दों में जानें तो हम त्रि-नेत्रीय वास्तविकता का चिंतन करते हैं..

जो जीवन की मधुर परिपूर्णता को पोषित करता है और वृद्धि करता है.. ककड़ी की तरह हम इसके तने से अलग हम जीवन व मृत्यु के बंधन से मुक्त हो…हालांकि दोनों ही मंत्र का उद्देश्य एक ही पर यदि देखा जाए तो महामृत्युजय मंत्र जल्दी परिणाम देता हैं क्योंकि जब साधक इस मंत्र का उच्चारण करता हैं तो शब्दों के स्वर में कंम्पन्ता पैदा होती हैं जिससे शरीर और आसपास के वातावण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता हैं…अगर कोई भी व्यक्ति नकारात्मकता से ग्रसित हैं और वो अपने जीवन के प्रगति पथ पर असफल हैं तो ऐसे लोगों को महामृत्युंजय की आराधना करनी चाहिए..

साथ ही अगर आपके घर में कोई लंबे समय से बीमार है और कई ईलाज करवाने के बाद भी रोगी स्‍वस्‍थ नहीं हो पा रहा है तो ऐसी स्थिति में महामृत्‍युंजय मंत्र का जाप एवं पूजन जरूर करना या करवाना चाहिए…

महामृत्युजय की पूजा आराधना से मनुष्य के जीवन में कभी नहीं नाकारात्मकता और रोग की काली छाया नहीं रहती हैं.इतना ही नहीं..ये पूजा नवग्रह दोष के निवारण के लिए भी उत्तम हैं जिससे नवग्रह दोष की शांति के लिए नौ ग्रहों को उनके मंत्रों द्वारा शांत किया जाता है..

महामृत्युजय की पूजन की विधी :-

सबसे पहले ये ध्यान जरूर रखें इस पूजन का सही लाभ प्राप्त करने के लिए समय और महूर्त पर ही प्रारम्भ करें..

फिर पूजन में लगनेवाली प्रत्येक सामग्री को अपने पूजा के स्थान में रख लें

महामृत्युजय की पूजन सामग्री :-

धूप, फूल पान के पत्ते, सुपारी, हवन सामग्री, देसी घी, मिष्ठान, गंगाजल, कलावा, हवन के लिए लकड़ी (आम की लकड़ी), आम के पत्ते, अक्षत, रोली, जनेऊ, कपूर, शहद, चीनी, हल्दी और गुलाबी कपड़ा..

सबसे पहले महामृत्‍युंजय मंत्र के जाप एवं पूजन का संकल्‍प लें…अब पूजन स्‍थल के सामने आसन पर बैठकर भगवान शिव का ध्‍यान करें.

अब सभी देवी-देवताओं का षोढषोपचार करें.
फिर ब्राह्मण का सत्‍कार करें और मंत्र का जप एवं पूजन आरंभ करें. उसके बाद आप यदि अपने लिए पूजन कर रहें हैं या किसी और के लिए तो उसका या अपना नाम एवं गोत्र, पिता का नाम, जन्‍म तारीख, स्‍थान का उच्चारण करें..और उसके बाद तललीनता से महामृत्युजय मंत्र का जाप करें.. तो जीवन में सदैव सकारात्मकता का संचार होता हैं..

(महामृत्युजय पूजा किसी जानकारी विद्वान के परामर्श और मार्गदर्शन में करें तो उत्तम रहेगा)

ज्योतिषचार्य- अंजना गुप्ता

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