मांगलिक का मतलब ज्योतिष में क्या है|Manglik Meaning

मांगलिक का सबसे ज्यादा प्रभाव 14 और असर 28 वर्ष तक माना गया है वहीं पर महिलाओं का कारक माना गया है क्योंकि रजोधर्म से जुड़ा हुआ होता है..
स्त्रियों के मांगल्य सुख का कारक माना गया है। यदि स्त्री की कुंडली में मंगल नीच हो, त्रिकभाव में हो, तो वैवाहिक जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आते हैं और बलवान मंगल सुख देते है..
मंगल और मांगलिक दोष में हमें ब्लड ग्रुप को भी देखना चाहिए चुकी मंगल रक्त का भी कारक होता है..blood group एक ही ब्लड ग्रुप के नहीं होना चाहिए..

मांगलिक का मतलब

जन्मकुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में यदि मंगल हो तो जातक मांगलिक होता है.. उत्तर भारत में देखा जाता है दक्षिण भारत में द्वितीय स्थान के मंगल को भी मांगलिक माना गया है..
मंगल का विवाहित जीवन में क्यों असर पड़ता है?

आइए समझते..विभिन्न देहों में सत्त्व तथा तम गुणों के अनुपात में बहुत अंतर है । इसका सीधा प्रभाव सुख को बनाए रखने की शरीर की क्षमता पर पडता है ।

वैवाहिक जीवन पर दुष्प्रभाव दो मांगलिक जातकों के साथ में विवाह करना उनके स्वभाव, विचार व मानसिकता की समानताओं के लिये होता है।

मंगल और कर्ज कुंडली में मंगल का पीड़ित होना भी कर्ज की समस्याओं से पीड़ित रखता है। यदि मंगल छठे, बारहवें भाव में हो,नीचस्थ हो, तो ऐसे व्यक्ति को लंबे समय तक कर्ज की समस्या से जूझना होता है..

मंगल कहां बलवान होता है?

मंगल अपने दिन में मंगलवार के दिन अपने नवांश में
ड्रेस कान वर्ग में, मीन वृश्चिक कुंभ मकर और मेष राशि में , रात्रि के समय, वक्री होने पर, दक्षिण दिशा में, राशि की शुरुआत में जीरो से 10 अंश तक बली होता है दशम भाव में कर्क का( नींच )का होने पर भी अच्छा फल देता है..
मंगल की दृष्टियां का प्रभाव से मांगलिक दोष बनता है

मंगल की दृष्टिओं का विचार बहुत महत्वपूर्ण होता है.. इस कारण से मांगलिक प्रभाव या मांगलिक दोष को महत्व दिया गया..
मंगल के पास तीन दृष्टियाँ होती हैं 4,7 और 8 यहां में मंगल पापी ग्रह है और उसकी दृष्टि में आग,है वह जहां देख रहा होगा उस घर के सुखों को जला देगा..

मंगल शेर के समान है जिसे पिंजड़े में बंद भी कर दिया जाए तब भी गुराना नहीं छोड़ता ह..
लग्न में बैठा मंगल या प्रथम भाव
ऐसा व्यक्ति
मंगल को क्रूर स्वभाव वाला, आक्रामक,लाल आंखों वाला, उतावला,उदार स्वभाव का, वहीं पर प्रभाव कटी प्रदेश में मध्य भाग में शरीर के अत्यंत कमजोर माना जाता है, मंगल को रक्त वर्ण के साथ शरीर में मज्जा की अधिकता देखी जाती है..

मांगलिक होने के फायदे और नुकसान

मंगल 1 प्रथम भाव में यहां से मंगल चौथी दृस्टि से घर 4 को देखेंगे तो घर 4 के सुख, और माता की तबीयत, मां का सुख ख़राब हो जायेंगे जैसे घर की शांति भंग घर में क्लेश का माहौल
7 पर सातवीं दृष्टि होने से जीवन साथी को सेहत से सम्बंधित परेशानी और रोजाना की कमाई में अस्थिरता दे देगा..

8 पर आठवीं दृष्टि होने से जो कि आयु, एक्सीडेंट का होता है जीवन में कई प्रकार के उतार चढ़ाव आते हैं। और ससुराल से परेशानी दे देगा, जीवनसाथी की आय को भी कर्ज में बदल देगा.. प्रोस्टेट और गर्भाशय में कैंसर या यूरिनरी ट्रैक्ट में किडनी फेल होने का कारण बनता है..

मंगल 4 चतुर्थ भाव में हों तो 4 मंगल के लिए नीच स्थान है.. यहां पर मां और सौम्यता का वास होता है.. मन में शांति को भंग कर देगा .. घर में चैन से बैठने नहीं देगा.. महिलाओं के लिए बार-बार गर्भपात का कारण बनेगा. वही कैंसर का भी कारण बनता है जोकि ब्रेस्ट कैंसर.

7 घर में उसकी चौथी दृष्टि होने से पर जीवन साथी के सुख सुविधाओं और शांति को भंग कर देगा. गायनिक प्रॉब्लम या सेक्स से संबंधित परेशानी के साथ सास बहू के संबंधों में दरार पैदा कर देगा, कमाई में दिक्कत देगी, और गर्भाशय में कैंसर के कारण बनता है.

10 घर पर उसके साथ में दृष्टि होगी पर होगी 10 पिता का, और स्वयं के कार्य करने का स्थान है . पिता के जीवन में, काम काज मे भी दिक्कत रहेगी। अपने बॉस पर या अपने से बुजुर्गों पर गुस्सा आएगा.. अपने ईगो के कारण व्यक्ति अपने साथ वालों को भी महत्व नहीं देता है.. हर बार उसे रोजगार बदलना पड़ता है.

11 घर पर आठवीं दृष्टि होने से पर मेहनत का लाभ नहीं मिलता यह लाभ स्थान है। बड़े भाई होते नहीं या उनसे सम्बन्ध खराब हो जाते हैं।बड़े भाई को अपने जीवन में अनेक कठनाइयों का सामना करना पड़ता है। किउंकि घर 11 बड़े भाई का स्थान भी है। यह स्थान मां के लिए अच्छा नहीं माना जाता है ऐसा व्यक्ति मां को मौत के मुंह तक ले जा सकता है..

तो मंगल देव इसी प्रकार से घर 7 8 और घर 12 में बैठ कर मांगलिक दोष बनाते हैं अपनी दृष्टियां से अधिक परेशानी खड़ी करते हैं..

दूसरे भाव का मंगल.. यह परिवार का स्थान है.. यहां से कर्ज का भाव भी एक्टिव होता है.. इसकी पंचम स्थान में चौथी दृष्टि होने से संतान के लिए अच्छा नहीं होता है शिक्षा में रुकावट पैदा करता है या शिक्षा होने ही नहीं देता है, या व्यक्ति का मन खेलकूद की ओर चला जाता .. प्रेम संबंधों को समाप्त कर देता है..

मंगल की सातवीं दृष्टि अष्टम स्थान में होने से ससुराल में लड़ाई झगड़े, या मिलती हुई प्रॉपर्टी, या भाई से झगड़े हो जाते हैं, और यह स्थान दुर्घटनाओं का भी है अचानक एक्सीडेंट होने के योग बनते हैं, खून से संबंधित बीमारियां कैंसर का भय होता है.
इसके साथ में दृष्टि नवम भाव में होती है. यह विदेश की यात्रा तो करा देता, धार्मिक उन्माद में यह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगता है, इससे पत्नी का पराक्रम भी प्रभावित होता है.
मांगलिक दोष क्या है?और क्यों होता है?

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