महाभारत के रचयिता कौन थे |Mahabharat ke Rachyita

महाभारत के रचयिता कौन थे-महाभारत एक बहुत पुराना महाकाव्य है, जो की आज के समय में बहुत प्रसिद्ध है। अगर आप महाभारत का अध्यन करते है तो आपको पता चलेगा कि इसमें कितनी ज्ञान की बाए है जो की आज रहस्य बन चुका है। क्योंकि संस्कृत तो मानो खत्म सी हो चुकी है, इसलिए हम  हिंदू धर्म के लोगो को जरूर से अपने महाकाव्य और ग्रंथो के बारे में पता होना चाहिए। 

दोस्तों, यह महाकाव्य विश्व का सबसे प्राचीन आर्षकाव्य तथा एताहसिक महाकाव्य है। जिसको पढ़ने से हमको बहुत कुछ पता चलता है जो की हमारी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए एक बहुत अच्छा उपाय भी है। आइए आज हम आपको अपने लेख की मदद से आपको महाभारत के रचयिता कौन है? और महाभारत के बारे में विस्तार से बताऊंगा जिससे आपको हमारी संस्कृति के बारे में अच्छे से पता चलेगा।

महाभारत का अर्थ क्या है ?

दोस्तों, महाभारत के नाम से ही पता चलता है की महाभारत का अर्थ महायुद्ध और महासंग्राम से है। महाभारत में आपको भारतवर्ष के चरित्र,  कौरव और पांडवों में बारे में विस्तार से बताया गया है।

महाभारत के रचयिता कौन थे ?

मित्रो, महाभारत को लिखने का श्रेय वेद व्यास को जाता है इन्होंने बहुत से तथ्यों को महाभारत में संकलित किया है। वैसे तो वेद व्यास ने अपने विचार को व्यक्त किया था और गणेश जी ने महाभारत को लिखा था। इसके पीछे भी बहुत रोचक कहानी है आइए हम आपको वेद व्यास और महाभारत के रचयिता से परिचय कराते है।

वेद व्यास कौन है ?

वेद व्यास जी द्वारा महाभारत की रचना हुई है यह तो आपको पता है किंतु अब सवाल आता है की वेद व्यास जी कौन थे। तो मैं आपको बता दूं की वेद व्यास जी एक बहुत बड़े साधु थे। वेद व्यास जी सत्यवती के पुत्र थे। सत्यवती की बात करें तो यह चित्रांगदा और विचित्रवीर्य के मरने के बाद इनको हस्तिनापुर की रानी बनाया गया था।

महाभारत कैसे लिखी गई थी ?

हिंदू धर्म में सबसे बड़ी और प्रसिद्ध किताबे रामायण और महाभारत ही है। आपको बता दूं कि महाभारत दुनिया की सबसे लंबी लिखी जाने वाली किताब है। इस पुस्तक में आपको मानवजाति में होने वाला सबसे बड़ा युद्ध जो की कौरवों और पांडवों में हुआ था उसके बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है।

वेद व्यास को महाभारत लिखने का विचार कैसे आया ?

दोस्तो, जैसा की मेने आपको बताया है की महाभारत की रचना वेदव्यास के द्वारा हुई है। तो अब बात आती है की इनके मन में महाभारत लिखने का विचार कैसे आया। दोस्तों, मैं आपको बता दूं की महाभारत को वेदव्यास ने अपनी आंखों से देखा था। एक बार वेद व्यास जी ध्यान की मुद्रा में थे तभी उनको ब्रह्मा जी एक स्मृति दिखी और उसमे ब्रह्मा जी ने उनको महाभारत को लिखने के लिए कहा ऐसा इसीलिए ही क्योंकि वेदव्यास जी ने महाभारत को पूरा देखा था।

महाभारत लिखने में वेदव्यास को क्या परेशानी आई ?

दोस्तों, ब्रह्मा जी ने इनको यह मुश्किल कार्य सौंपा किंतु वेदव्यास जी परेशान थे और सोच रहे थे की इतनी बड़े संग्राम को और इसमें किरदार के बारे में लिखना बहुत कठिन होगा। इसीलिए ब्रह्मा जी ने उनको एक सलाह दी की आप भगवान गणेश जी की सहायता ले सकते है जो की दूसरो के दुख को हरते रहते है।

गणेश जी ने वेदव्यास की किस प्रकार सहायता की ?

दोस्तो, गणेश जी सभी के दुख हरते है, और महाभारत को लिखने का श्रेय गणेश जी को भी जाता है। वेदव्यास जी ने महाभारत को लिखने के लिए गणेश जी का ध्यान किया और गणेश जी उनकी आंखो के सामने आ गए, तभी वेदव्यास ने उनसे पूछा की क्या महाभारत लिखने में तुम मेरी सहायता करोगे तो उन्होंने इसके लिए हस्ते हस्ते हां करदी। 

गणेश जी ने वेदव्यास के सामने क्या शर्त रखी ?

गणेश जी ने वेदव्यास के सामने एक शर्त रखी ताकि वह महाभारत को जल्दी लिख सके। गणेश जी ने वेदव्यास जी से कहा की आप मुझको इसके बारे में बताइए और मैं लिखूंगा किंतु अगर आपने बीच में बोलना बंद किया तो मैं महाभारत को लेकर चला जाऊंगा। 

और फिर वेदव्यास जी इसके लिए मान गए किंतु वेदव्यास जी ने भी गणेश जी के सामने एक शर्त रखी जिसमे वेदव्यास जी ने कहा की मैं आपको जो भी बोलूंगा उसका अर्थ समझकर ही आपको लिखना बिना अर्थ समझे यह नही लिखना है। 

जब भी वेदव्यास जी थक जाते थे तो वह गणेश जी को एक कठिन श्लोक देते थे जिसको समझने में गणेश जी को समय लगता था उस बीच में वेदव्यास जी आराम कर लेते थे।

इसके लिए गणेश जी मान गए, और फिर ऐसे ही महाभारत को लिखने की शुरुवात हो गई।

महाभारत में कुल कितने पर्व है ?

महाभारत में कुल 18 पर्व है, आइए हम आपको इसके बारे में बताते है –

पहला अध्याय ( आदि पर्व ) – यह पर्व महाभारत का पहला पर्व है जिसमे चंद्रवंश का जिक्र देखने को मिलता है और साथ में पांडवों की उत्पत्ति के बारे में भी देखने को मिलता है।

दूसरा अध्याय (सभा पर्व) – इस पर्व में आपको ध्रुतकीडा के बारे में जानने को मिलता है और इसके साथ में आपको शिशु वध नामक आख्यान भी देखने को मिलता है।

तीसरा अध्याय (वन पर्व) – यह महाभारत का तीसरा पर्व है जिसमे पांडवों के वनवास के बारे में वर्णन देखने को मिलता है इसीलिए इस पर्व का नाम भी वन पर्व पड़ा। राजा और दमयंती का वर्णन भी आपको इसमें देखने को मिलता है। इसमें आपको भगवान श्री राम और सत्यवान और सावित्री के बारे में भी जानने को मिलता है।

चौथा अध्याय (विराट) – यह महाभारत का चौथा अध्याय है, उसमे आपको पांडवों के वनवास के बारे में जानने को मिलता है।

पांचवा पर्व (उद्योग पर्व) – इस पर्व में आपको भगवान श्री कृष्ण का सन्धि प्रस्ताव देखने को मिलता है।

छ्टा पर्व (भीष्म पर्व) – यह पर्व बहुत प्रसिद्ध है और आपको बता दूं की भगवतगीता में इसका संकलन देखने को मिलता है जो की इसी पर्व से लिया गया है।

सातवा अध्याय ( द्रोण पर्व ) – इस पर्व में अभिमन्यु और द्रोणाचार्य का वध दिखाया गया है जिसकी वजह से इसका नाम द्रोण पर्व पड़ा है।

आठवा अध्याय और नवा पर्व ( शल्य ) – इस पर्व में और नवें पर्व में आपको अंगराज कर्ण और अर्जुन का युद्ध का वर्णन मिलता है।

दसवां अध्याय (सौप्तिक पर्व) – इस अध्याय में आपको अश्वथमा द्वारा पांडव पुत्रो का वध के बारे में जानने को मिलता है।

ग्यारहवां अध्याय ( स्त्री पर्व ) – शोक संतप्त स्त्रीयों के विलाप का वर्णन देखने को मिलता है।

बहरावां अध्याय (शांति पर्व) – युधिष्ठिर द्वारा पूछे गए प्रश्नों और भीष्म द्वारा उत्तर देने का वर्णन इसमें आपको मिलता है।

तेहरवां अध्याय (अनुशासन पर्व) – अनुशासन, धर्म और नीति के बारे में वर्णन देखने को मिलता है जिसकी वजह से इसका नाम अनुशासन पर्व रखा गया है।

चौदह अध्याय (आशमेघिक पर्व) – युधिष्ठिर द्वारा अशमेघ यज्ञ का वर्णन इसमें मिलता है।

पंद्रह अध्याय (आश्रमवासिक पर्व) – इसमें आपको ध्रतराष्ट्र आदि का वानप्रस्थ आश्रम की ओर गमन का वर्णन देखने को मिलता है।

सोहलवा अध्याय (मौसल पर्व) – इसमें आपको यदुवंश के विनाश का वर्णन देखने को मिलता है।

सत्रहवा अध्याय (महाप्रस्थानिक पर्व) – पांडवों द्वारा हिमालय में जाने का वर्णन आपने इसमें मिलता है।

अठारहवा अध्याय (स्वर्गारोहण पर्व) – यह महाभारत का अंतिम पर्व है जिसमे आपको पांडवों का स्वर्ग में जाने का वर्णन देखने को मिलता है।

निष्कर्ष:

दोस्तों, आज मेने आपको अपने लेख की सहायता से न केवल महाभारत के रचयिता कौन थे इसके बारे में बताया बल्कि मेने आपको महाभारत का अर्थ क्या है ?,वेद व्यास कौन है ?,महाभारत कैसे लिखी गई थी ?,वेद व्यास को महाभारत लिखने का विचार कैसे आया ?,महाभारत लिखने में वेदव्यास को क्या परेशानी आई ?,

गणेश जी ने वेदव्यास की किस प्रकार सहायता की ?,गणेश जी ने वेदव्यास के सामने क्या शर्त रखी ? और महाभारत में कुल कितने पर्व है ? इन सबके बारे में विस्तार से बताया है जिसकी सहायता से आपको महाभारत के बारे में अच्छे से पता चल गया होगा तथा आपके मन में अब महाभारत से जुड़ा कोई अन्य सवाल नही बचा होगा फिर भी अगर आपको कोई प्रश्न है तो आप हमसे comment के माध्यम से उसका उत्तर पा सकते है।

Leave a Comment