Hanuman Chalisa In Hindi |हनुमान चालीसा


हनुमान चालीसा का पंचतत्व 12 राशियों का उपचार

कलिकाल और काल पुरुष के 12 भाव में निहित है हनुमान चालीसा की चौपाइयां ज्योतिष की 12 राशियों में भी नौ ग्रहों के साथ भावों का भी संबंध है
आइए जानते हैं कैसे?

कुंडली के चारों भाव धर्म अर्थ काम मोक्ष
जो कि आधार है हनुमान चालीसा का..
धर्म
ज्योतिष में 1,5,9अग्नि तत्व त्रिगुणात्मक शक्ति

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का ज्योतिष रहस्य


मेष सिंह धनु राशि

अर्थ


पृथ्वी तत्व धन कुटुंब रोजगार की प्राप्ति तीन भाव 2,6,10।


वृषभ कन्या मकर राशि
काम


3,7,11  पराक्रम पूर्वक व्यापार या आय के स्रोत की वृद्धि करते हैं। वायु सुंगंधित दव्यों से पूजन करते है।


मिथुन तुला कुंभ राशि
मोक्ष


4,8,12 जल तत्व नेगेटिव विचारों का विसर्जन करते


कर्क वृश्चिक मीन राशि


भारी-से-भारी संकट पड़ने पर भी विशुद्ध प्रेमभक्ति और हनुमान – साक्षात्कारके सिवा अन्य किसी भी सांसारिक वस्तुकी कामना, याचना या इच्छा कभी नहीं करनी चाहिये | 12 राशियों और नवग्रहो का निवारण स्वत: हो जाता है,:
मंगल ग्रह के आधिपत्य देव हनुमानजी हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें..


इन्हें अनुशासन और स्वच्छता अत्यधिक पसंद होती है।।
जिन जातकों की कुंडली में मंगल अशुभ प्रभाव देने वाला हो तो इन जातकों को अनुशासित रहना चाहिए, हमेशा समय का पाबंद होना चाहिए।।


ऐसे जातकों को स्वच्छ अर्थात सुनियोजित तरीके से वस्त्र धारण करने चाहिए।।
अगर आप हनुमानजी की पूजा करते हैं तो रोजाना एक ही क्रम में चालीसा का पाठ करें और एक निश्चित समय पर अपनी उपासना करें।।


विशेष अनुष्ठान में*
कोर्ट कचहरी के, बंधन में किसी, कोई विपत्ति हो, नवग्रह शांति करना आदि में यह अनुष्ठान विशेष लाभकारी है..
पहले दिन बढ़ते क्रम में
एक, दूसरे दिन दो, तीसरे दिन तीन चौथे दिन 4, पांच में दिन पांच, छठ दिन 6, सातवें में दिन 7 आठवें दिन 8, नौवें दिन नो
फिर उतरता क्रम में करें पहले 8,7,6,5,4,3,2,1
इस तरह आखिरी दिन हनुमान चालीसा क हवन करें..

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। 

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। 

ज्योतिष के 12 भाव और राशियों का संबंध..
चोपाइयों से


1.भाव मेष राशि


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥


कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा॥


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।


2.भाव वृषभ राशि


रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥


संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन॥

3.भाव मिथुन राशि

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे


जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

4.भाव कर्क राशि


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥


सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।


और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥

5.भाव सिंह राशि

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥


तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै॥


6.भाव कन्या राशि


भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥


नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥


आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥


भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

7.भाव तुला राशि


कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई।


छूटहि बंदि महा सुख होई॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।


राम लखन सीता मन बसिया॥
लाय सजीवन लखन जियाये।


श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥


8.भाव वृश्चिक राशि


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥


राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥


सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना॥


आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥


भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥


9.भाव धनु राशि


जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाही॥


यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥


तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥


10.भाव मकर राशि


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥


मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा।


तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै

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11.भाव कुंभ राशि


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥


तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥


12.भाव मीन राशि


अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता
चित्त न धरई।


हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।


जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।


जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं।


कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥

॥दोहा॥

पवन तनय संकट हरन,

मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित,

हृदय बसहु सुर भूप ॥

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