Ganesha Chalisa in Hindi|श्री गणेश चालीसा

Ganesha Chalisa-“परमात्मा सर्वश्रेष्ठ श्रोता हैं,आपको उनके सम्मुख चिल्लाने व ज़ोर से बोलने की आवश्यकता नहीं,बल्कि एक शांत हृदय की शांत पुकार भी वो सुन लेते हैं..
आज से हम हर रोज़ गणेश जी के सम्मुख शांति से बैठें…!!!”गणेश चालीसा का करें पाठ ..
गणेश जी अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले बुद्दि के अधिष्ठाता और साक्षात् प्रणवरूप है। गणेश का अर्थ है – गणों का ईश अर्थात गणों का स्वामी। किसी पूजा आराधना, अनुष्ठान व् कार्य में गणेश जी के गण कोई विघ्न – बाधा न पहुंचाए, इसलिए सर्वप्रथम गणेश पूजन कर उनकी कृपा प्राप्त होती है।
प्रत्येक शुभकार्य के पूर्व “श्री गणेशाय नमः ” का उच्चारण कर यह मंत्र बोल जाता है :
गजाननं भूत गणादि सेवितं”

श्री गणेश चालीसा (Ganesha Chalisa)

गणेशजी के माता-पिता : पार्वती और शिव। * गणेशजी के भाई : श्रीकार्तिकेय (बड़े भाई)। हालांकि उनके और भी भाई हैं जैसे सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। * गणेशजी की बहन : अशोक सुंदरी। हालांकि महादेव की और भी पुत्रियां थीं जिन्हें नागकन्या माना गया- जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतलि। अशोक सुंदरी को भगवान शिव और पार्वती की पुत्री बताया गया इसीलिए वही गणेशजी की बहन है। इसका विवाह राजा नहुष से हुआ था।

* गणेशजी की पत्नियां : गणेशजी की 5 पत्नियां हैं : ऋद्धि, सिद्धि, तुष्टि, पुष्टि और श्री। * गणेशजी के पुत्र : पुत्र लाभ और शुभ तथा पोते आमोद और प्रमोद। * अधिपति : जल तत्व के अधिपति। * प्रिय पुष्प : लाल रंग के फूल। * प्रिय वस्तु : दुर्वा (दूब), शमी-पत्र। * प्रमुख अस्त्र : पाश और अंकुश। * गणेश वाहन : – सिंह, मयूर और मूषक। सतयुग में सिंह, त्रेतायुग में मयूर, द्वापर युग में मूषक और कलियुग में घोड़ा है।

* गणेशजी का जप मंत्र : – ॐ गं गणपतये नम: है। * गणेशजी की पसंद : – गणेशजी को बेसन और मोदक के लड्डू पसंद हैं। * गणेशजी की प्रार्थना के लिए : – गणेश स्तुति, गणेश चालीसा, गणेशजी की आरती, श्रीगणेश सहस्रनामावली आदि। * गणेशजी के 12 प्रमुख नाम : – सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन। हर हर महादेव

दोहा
जय गणपति सदगुण सदन,
कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण,
जय जय गिरिजालाल ॥

चौपाई

जयजयजयगणपतिगणराजू

मंगलभरणकरणशुभःकाजू

जै गजबदन सदन सुखदाता ।

विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥

वक्रतुण्डशुचीशुण्डसुहावना

तिलकत्रिपुण्डभालमनभावन

राजत मणि मुक्तन उर माला ।

स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

पुस्तकपाणिकुठारत्रिशूलं

मोदकभोगसुगन्धितफूलं

सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।

चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

धनिशिवसुवनषडाननभ्राता

गौरीलालनविश्वविख्याता

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।

मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥

कहौजन्मशुभकथातुम्हारी

अतिशुचीपावनमंगलकारी

एक समय गिरिराज कुमारी ।

पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥

भयोयज्ञजबपूर्णअनूपा

तबपहुंच्योतुमधरीद्विजरूपा

अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।

बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

अतिप्रसन्नहवैतुमवरदीन्हा

मातुपुत्रहितजोतपकीन्हा

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।

बिना गर्भ धारण यहि काला ॥

गणनायकगुणज्ञाननिधाना

पूजितप्रथमरूपभगवाना

अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।

पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥

बनिशिशुरुदनजबहिंतुमठाना

लखिमुखसुखनहिंगौरीसमाना

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।

नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

शम्भु, उमा, बहुदानलुटावहिं

सुरमुनिजन, सुतदेखनआवहिं

लखि अति आनन्द मंगल साजा ।

देखन भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥

निजअवगुणगुनिशनिमनमाहीं

बालक, देखनचाहतनाहीं

गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।

उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥

कहतलगेशनि, मनसकुचाई

काकरिहौ, शिशुमोहिदिखाई

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।

शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥

पदतहिंशनिदृगकोणप्रकाशा

बालकसिरउड़िगयोअकाशा

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।

सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥

हाहाकारमच्यौकैलाशा

शनिकीन्होंलखिसुतकोनाशा

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।

काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥

बालककेधड़ऊपरधारयो

प्राणमन्त्रपढ़िशंकरडारयो

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।

प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥

बुद्धिपरीक्षाजबशिवकीन्हा

पृथ्वीकरप्रदक्षिणालीन्हा

चले षडानन, भरमि भुलाई ।

रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥

चरणमातुपितुकेधरलीन्हें

तिनकेसातप्रदक्षिणकीन्हें

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।

नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥

तुम्हरीमहिमाबुद्धिबड़ाई

शेषसहसमुखसकेगाई

मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।

करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

भजतरामसुन्दरप्रभुदासा

जगप्रयाग, ककरा, दुर्वासा

अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।

अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥

दोहा

श्री गणेश यह चालीसा,

पाठ करै कर ध्यान ।

नित नव मंगल गृह बसै,

लहे जगत सन्मान ॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,

ऋषि पंचमी दिनेश ।

पूरण चालीसा भयो,

मंगल मूर्ती गणेश ॥

जय गजानन भगवान की।

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