महिलाएं क्यों पहनती हैं चूड़ियां ? क्या है इसका हिंदू धर्म में महत्व

चूड़ियां (chudiyan)-ब्रह्मास्त्र से कम नहीं है देवी के सिंगार
चूड़ी नहीं मेरी तकदीर है…. देखो देखो यह परंपरा अब छूटे ना….
यह परंपरा 21शताब्दी मैं भी जारी है सिंधु सरस्वती मोहनजोदड़ो हड़प्पा आदि सभ्यताओं से जुड़ा है प्राचीन और भाग्य और कर्म दोनों का ही आधार है यह ऊर्जा या देवी के उपहार के स्वरुप हर सुहागन का सुहाग है वहीं विभिन्न धातुओं से जुड़ी हुई तरंगों यह

महिलाओं की बहुत पावरफुल रेमेडीज


जहां पांच शरीर के पांच तत्वों का तालमेल का प्रयोग करके ऊर्जा के स्तर को बढ़ाना इसका आधार है..
पूर्व / पाश्चात्य में भी यह प्रचलन है.. यह ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के ब्रेसलेट या घड़ियों का प्रचलन इसका मुख्य कारण है एक विशेष पॉइंट कलाई में या नाडी में होता है जो आयुर्वेद से भी जुड़ा हुआ होता है यहां से ऊर्जा को बढ़ाने का स्तर या कम करने का स्तर काम करता है और बीपी वालों के लिए विशेष प्रकार के ब्रेसलेट बनाने का कारण भी देखा जा सकता है.

भारतीय परंपरा के आधार पर विभिन्न मास में विभिन्न प्रकार की चूड़ियों का प्रचलन आखिर क्यों रहा है…
मुख्य रूप से यह किन ग्रहों से जुड़ा बिंदु देखना बहुत जरूरी है..

सूर्य ग्रह


ऊर्जा व स्पंदन बढ़ाने के लिए क्योंकि चूड़ियों से एक विशेष प्रकार की सकारात्मक बेब्स निकलती हैं जो सर्कल के रूप में लगातार प्रवाहित होती रहती है .


केतु ग्रह


कलर थेरेपी के रूप में यह रिमेडी होती है क्योंकि बहुत सारे कलर का उपयोग किया जाता है..

चंद्र ग्रह


यह वेवलेंथ एक तरह से मानसिक एनर्जी या मन मैं खुशियों का संचार करती है…

मंगल ग्रह


महिलाओं के लिए मंगल ग्रह का बहुत महत्व है इसलिए विवाह को भी लाल रंग दिया गया है चूड़ियां मांगलिक कार्यों से भी जुड़ी हैं..

गुरु ग्रह


हर चूड़ियों का विशेष वाइब्रेट साउंड के रूप में अलग अलग होता है (अंतरिक्ष)और महिलाओं के लिए गुरु तत्व बढ़ाने के लिए चूड़ियां भी शामिल है.

शुक्र ग्रह


विशेष आकर्षण साउंड और रंग के द्वारा सेक्स पावर को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है.. ह्यूमन क्षमता में वृद्धि हो..

बुध ग्रह


एक नए सृजन के लिए नवीनता लिए चंचल खनखन आती चूड़ियां किसी बचपन की याद जैसी होती हैं..

शनि ग्रह


बुजुर्गों के सम्मान के लिए पर्दा प्रथा से भी जुड़ा है चूड़ियों का रहस्य किसी के आने की आहट होने पर चूड़ियों की आवाज एक सम्मानजनक रूप में होती है

राहु ग्रह


किसी चालाकी या चुप्पी को तोड़ती हुई कांच की चूड़ियां राहु ग्रह से जुड़ी हैं विभिन्न धातु की चूड़ियां चार्ज के रूप में… यह एक महिलाओं बचाव का भी साधन है.
विभिन्न माह में विभिन्न प्रांतों में अलग- अलग त्योहारों में अलग महत्त्व होता है. जो विभिन्न रंगो, आकृति से, बजन, धातुओं से चूड़ियों का धार्मिक महत्व भी है… जिससे कि कलर थोरपी के द्वारा, सूर्य व चंद्र के साथ अलग-अलग वेवलेंथ में स्वास्थ्य मैं वृद्धि करता है.


चैत मास..


गणगौर व्रत या सौभाग्य सुंदरी व्रत ऑरेंज रंग की चूड़ियां या लाख की चूड़ियों का विशेष महत्व है. मारवाड़ी समाज चूड़ी का प्रचलन है क्योंकि इसे एक प्राकृतिक रार होती है मांगलिक औषधि के रूप में माना जाता है यह पीपल और प्लास के पेड़ पर लगती है जिससे कि बीपी ओर हर्ट्स जैसी बीमारियों के लिए रीमिडीज के लिए लिया जाता है.. वैशाख मास
अक्षय तृतीया गौरी के सौभाग्य से चांदी या सोने की चूड़ियों का विशेष महत्त्व खरीददारी से भी जुड़ा है.


जेष्ठ मास वट पूर्णिमा/ अमावस व्रत


महाराष्ट्र में हरे रंग की चूड़ियों का विशेष महत्व है.महाराष्ट्र में, दुल्हन चूड़ा काफी अलग है। दुल्हनें विषम संख्या में हरे कांच की चूड़ियां पहनती हैं। उसके लिए यह दर्शाता है कि उसका वैवाहिक जीवन प्यार और स्नेह से भरा होगा।
आषाढ़ मास भड़ली नवमी पीली चूड़ियों का विशेष महत्व है इसमें मीना की कारीगरी महत्वपूर्ण हैं जो खुशियों को बढ़ाती है.. सोने की चूड़ियाँ आमतौर पर दूल्हे के परिवार द्वारा उपहार में दी जाती हैं।


सावन मास


हरियाली तीज.. हरी चूड़ियों का नव -दुल्हन के लिए विशेष महत्व है नए क्रिएशन के लिए हरा रंग रचनात्मकता, नए जीवन और उर्वरता का प्रतीक है।
वे इन्हें ठोस सोने की चूड़ियों के साथ पहनते हैं जिन्हें पटल्या कहा जाता है और नक्काशीदार कड़ा जिसे टोड कहा जाता है।


भादो मास


कजरी तीज या हरितालिका तीज यह उत्तर भारत और दक्षिण भारत के हिसाब से अलग-अलग रंग हरी नीली, पीली,लाल, काली, कांच / धातु की चूड़ियां हैं
यहां पर साल का मध्य होता है सेक्स ऊर्जा, स्पंदन ऊर्जा के साथ साथ प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है… कन्याओं के मायके आगमन व बेबी बर्थ का वैज्ञानिक रूप भी दिखाई देता है क्योंकि इस समय पृथ्वी अपने नए- योबना के रूप में हरी होती है..


अश्वनी मास


शारदीय नवरात्रि में दुर्गा पूजन बंगाल में हाथी दांत या पोला के लाल सफेद चूड़ियों का विशेष महत्व है .
शंख” (शंख की चूड़ियाँ), “पोला” (कोरल से बनी लाल चूड़ियाँ) और “लोहा” (लोहे की चूड़ियाँ) वह उन्हें अपने बाएं हाथ पर पहनती है।


सफेद (शोखा) और लाल (पोला) के साथ यह हाथ को एक अलग चमक और शुक्र ग्रह को दिव्य बनाता है।
यही पंजाब से जुड़ा हुआ करवा चौथ का त्यौहार मेटल की चूड़ियों का सोने व चांदी आदि का भी


कार्तिक मास


देवउठनी ग्यारस तुलसी विवाह में काली चूड़ियों का विशेष महत्व होता है जो शादी विवाह से जुड़ा हुआ है यह नेगेटिविटी को समाप्त (नजर )करने के लिए होत है इसलिए काली चूड़ियों का और लाल चूड़ियों का महत्व है..


अगहन मास


विवाह पंचमी सीता विवाह को लाल पीली चूड़ियों का यह महत्त्व सुहाग से जुड़ा हुआ है..


पौष मास


ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए इस मास में कॉपर की चूड़ियों का विशेष महत्व होता है. क्योंकि पाचन शक्ति काफी कमजोर होने के कारण रविवार के दिन इसे धारण किया जाता है..


माघ मास


बसंत पंचमी या सरस्वती पूजा सफेद ओर पीली चूड़ियों का विभिन्न रंग की धातुओं का का प्रयोग दिमाग की ऊर्जा बढ़ाने के लिए किया जाता है..

शिवलिंग क्या है? शिवलिंग का अर्थ क्या है-


फाल्गुन मास


महाशिवरात्रि के दिन पार्वती को सुहाग के रूप में इस आहोरात्रि में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए विभिन्न
रुद्राक्ष चूड़ियों को जो चढ़ा कर धारण किया जाता है..
विभिन्न राशियों वालों को किस रंग की चूड़ियां और किस धातु की चूड़ियां पहनना चाहिए?क्यों?


मेष राशि


गहरे हरा रंग की चूड़ियां पहनने से जोश उत्साह उर्वरक क्षमता थकान नहीं लगेगी…. साथ ही साथ सीप चूड़ियां भी पहन सकते हैं
अग्नि तत्व होने के कारण इन्हें कॉपर या ब्रास की चूड़ियां पहनना चाहिए . सोने की भी पहन सकते हैं
यह ब्लड फ्यूरी फिकेशन और बॉडी में किडनी से संबंधित प्रॉब्लम में भी पहन सकते हैं

वृषभ राशि


यह हल्के नीले, सफेद, बैगनी रंग, लाल की चूड़ियों के पहनने से इनके अंदर निष्ठा प्रेरणा कृतज्ञता और नवीन ओर आज्ञाकारी गुण आते हैं..
पृथ्वी तत्व होने से चांदी का विशेष प्रयोग चूड़ियों के रूप में करना चाहिए हारमोंस बैलेंस, गुस्सा को कंट्रोल करती, मनोबल बढ़ाने के लिए..

मिथुन राशि

इन राशि वालों को गुलाबी,,पीली रंग की चूड़ी पहनना चाहिए कार्य को करने में संदेह समाप्त हो जाता है,किसी भी बीमारी ठीक,धर्मउत्साही,
लाख, तीन धातु से बने चूड़ियों को भी धारण कर सकते हैं धन लाभ के लिए..

कर्क राशि


हरे रंग की चूड़ियां, ऑरेंज कलर की धारण करने से मन और स्वास्थ्य, बुद्धिमत्ता नए कार्यों को करने में मन लगता है.
इन्हें धातु में हाथी दांत, अष्ट धातु चूड़ियां भी धारण कर सकती है गंभीर बीमारियों से और मानसिक बीमारियों से बचाव होता है

सिंह राशि


गहरी पीली चूड़ियां, गुलाबी चूड़ियां पहनने से कार्य के प्रति निष्ठा अहंकार में कमी आती है वही खुशियां बढ़ जाती है
सोने की धातु धारण करने से काया की शुद्धि होती है और आपने विश्वास को बढ़ा सकते हैं यह धातु सात्विक होती है..


कन्या राशि


इंडियन लाल रंग की, सफेद रंग की, पोला, धारण करना चाहिए अपनी उर्जा को पॉजिटिविटी में चेंज कर सकती हैं मेंटली रिलैक्स भी मिलता है
स्टील, हाथी दांत के कड़े हड्डियों व जोड़ों के दर्द में
रिलैक्स मिलता है वही दुर्घटनाओं से, इंफेक्शन से बचते हैं..

तुला राशि


पक्का नीले रंग की, काला लाल रंग की चूड़ियां पहनना चाहिए उत्साह में वृद्धि होती है स्पष्ट बादिता आती है. बुद्धिमानी व चालाकी से कार्य कर सकते है
चांदी व प्लैटिनम की चूड़ियां( धातु) धारण करने से
किसी कार्य को करने में नेगेटिव विटी भी दूर होती है
मन में कंट्रोल रहेगा चेहरा भी चमकेगा..

वृश्चिक राशि


हल्का हरा रंग की, हल्की बैगनी कलर की चूड़ियां इनको पहनने से इनमें उत्साह निष्कपट का बुद्धिमत्ता का विकास होगा.. और शक्ति संपन्नता आएगी
वहीं पर कॉपर, पीतल धातु की चूड़ियां धारण करने से पित्त, त्वचा और आंखों के लिए रिलैक्स मिलेगा

धनु राशि


भड़कीले नीला रंग, हल्का पीला रंग, लाइट कलर की चूड़ियां पहनने से कार्य करने में स्वतंत्रता, अभी से अच्छी मित्रता और नेगेटिव होरा को ब्लॉक कर सकती है..
सोने की विशेष कलाकारी वाली चूड़ियों को पहनने से
आपको खुशियां और आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आपने सात्विकता और शुद्धता के साथ तरक्की करेंगे


मकर राशि


इन्हें गहरे पीले रंग की लाल रंग की चूड़ियां कांच की विशेष रूप से पहनना चाहिए जिससे यह अपने को ऊर्जावान,भावुकता से बचा सकती हैं, सफेद रंग की चूड़ियां एवाइट करना चाहिए..
विभिन्न मेटल या मिक्स मेटल की चूड़ियां पहन सकते हैं रुद्राक्ष की चूड़ियां भी धारण की जा सकती हैं अगर शनि का नेगेटिव प्रभाव है तो आप इसके लिए लोहे की चूड़ी भी धारण कर सकती हैं..

कुंभ राशि


गहरे लाल, ऑरेंज, कत्थई कलर की चूड़ियां आपको धारण करना चाहिए हार्ड वर्क करने की प्रेरणा मिलेगी गुड लक के लिए भी आपके काम आएगी
लाख,सिल्वरगोल्ड, अष्टधातु की चूड़ियां धारण करना चाहिए प्रतिष्ठिता बा भव्यता में वृद्धि होगी

मीन राशि


रंग बिरंगी चूड़ियों के साथ काले रंग की चूड़ी मिलाकर पहनना चाहिए जिससे कि आप अपने विचारों में कंट्रोल कर पाएंगे इमोशन को कंट्रोल करने के लिए चांदी की धातु की चूड़ियां और कॉपर की चूड़ियां भी धारण कर सकती हैं फर्टिलिटी पावर को बढ़ा सकती हैं..


किस तरह से कुछ नियम है जैसे की विधवाओं को धातु की चूड़ी पहन सकती है कांच की चूड़ी में विशेष रुप से राहु व शुक्र का प्रभाव होता है जो प्रजनन क्षमता को भी बढ़ाता है प्लास्टिक की चूड़ियों को धारण करना मना है हाथों में चूड़ियां पहनने का अर्थ है लक्ष्मी की कृपा हस्त लक्ष्मी हमारे ऊपर कृपा करती हैं ह

म अपनी बॉडी को भी प्यूरिफाई कर पाते हैं चंचलता से भी इसका संबंध है आदि शक्ति के तत्व को बढ़ाने वाला यह चूड़ी को धारण करने का विशेष महत्व है वहीं पर यह चूड़ियां हमें संदेश देती हैं कि सौभाग्य के साथ-साथ भारत में चूड़ियों और विभिन्न धातु की चूड़ियों से से ही हम अपनी शुद्धता को और सात्विकता को समावेश कर सकते हैं..

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