ब्लड प्रेशर कम करने का मंत्र 2022

ब्लड प्रेशर कम करने का मंत्र-दोस्तों, आज के समय में ब्लड प्रेशर एक ऐसी समस्या है जिसमे आज बहुत से लोग पीड़ित है, और यहां तक की कई सारे नवयुवक भी इस समस्या से ग्रसित है। आपको जान कर आश्चर्य होगा की अमेरिका में ब्लड प्रेशर की समस्या से लगभग 5 करोड़ लोगो ने अपनी जान गवाई है।

कई सारे ऐसे लोग है जिनको पता भी नही होता है की उनको ब्लड प्रेशर की समस्या है और जिनको मालूम भी होता है तो वह उसका सही प्रकार से इलाज न कर पाने से अपनी जान गवा देते है। आपको पता होना चाहिए की ब्लड प्रेशर की समस्या को साइलेंट किलर के नाम से जाना जाता है। 

अब आपको अंदाजा लग गया होगा की यह समस्या कितनी खतरनाक है, ऐसे में अगर मैं आपको ब्लड प्रेशर कम करने का मंत्र क्या होता है ये बताऊ तो आपको भी जानकर हैरानी होगी की एक शोध के मुताबिक मंत्र का उच्चारण करने से हम ब्लड प्रेशर और ह्रदय रोग की समस्या से छुटकारा पा सकते है।

ब्लड प्रेशर कम करने का मंत्र ?

दोस्तों, आपने गायत्री मंत्र का नाम तो सुना होगा। यह एक बहुत ही चमत्कारी मंत्र है। ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए गायत्री मंत्र एक बहुत अच्छा उपाय हो सकता है। यह सिर्फ मैं नही बल्कि विज्ञान भी मानती है की गायत्री मंत्र का उच्चारण करने से हम ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों से कोशो दूर रह सकते है। आइए आज मैं आपने अपने लेख में गायत्री मंत्र का अर्थ और गायत्री मंत्र का उच्चारण कैसे करते है, इसकी विधि और समय के बारे में बताता हूं।

गायत्री मंत्र का अर्थ ?

दोस्तों, यह मंत्र बहुत अधिक प्रभावी होता है इसीलिए इसके अर्थ के बारे में भी आपको पता होना चाहिए तो चलिए आज मैं आपने इसका सम्पूर्ण अर्थ बताता हूं।

ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

ॐ : परब्रह्मा का अभिवाच्य शब्द

भूः :  भूलोक

भुवः : अंतरिक्ष लोक

स्वः : स्वर्गलोक

त : परमात्मा अथवा ब्रह्म

सवितुः : ईश्वर अथवा सृष्टि कर्ता

वरेण्यम : पूजनीय

भर्गः:  अज्ञान तथा पाप निवारक

देवस्य : ज्ञान स्वरुप भगवान का

धीमहि : हम ध्यान करते है

धियो :  बुद्धि प्रज्ञा

योः :  जो

नः : हमें

प्रचोदयात् : प्रकाशित करें। 

अर्थात; इसका अर्थ यह है की हम ईश्वर की प्रार्थना करते है, जिसने संसार के स्थापना की है, जो की पूजनीय है, जिसके पास ज्ञान का भंडार है। जो की अज्ञान और पापो को दूर करने वाला है वह हमे सही पथ दिखाए और प्रकाश दिखाए।

Read Also- श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र के फायदे

गायत्री मंत्र का जप करने के विधि ?

दोस्तों, हर एक मंत्र का उच्चारण करने की अपनी एक अलग विधि होती है इसी प्रकार गायत्री मंत्र का उच्चारण करने की भी अपनी एक विधि है जिसका पालन करने पर हमको गायत्री मंत्र का पूरा लाभ मिलता है। 

आपको ध्यान रखना चाहिए की आप जब गायत्री मंत्र का जप करें तो कुशा आसान का प्रयोग करें। अगर आप रुद्राक्ष की माला के सात जप करते है तो उत्तम रहता है नही तो आप तुलसी और चंदन की माला के साथ भी इसका जप कर सकते है।

गायत्री मंत्र का जाप करने का सही समय ?

दोस्तों, कई लोग मंत्रो का जाप अपने मन मुताबिक समय से करते है जो की ठीक नही है अतः उनको मंत्री का लाभ नही मिलता है इसीलिए आप जब गायत्री मंत्र का जप करें तो ध्यान रहे की आप पूर्व दिशा की ओर मुख करके इसका जप करें। इसका जप करने के लिए आप तीस समय का उपयोग कर सकते है। आप सुबह सूर्योदय से पहले से सूर्योदय के बाद तक, दोपहर में और शाम को इसका जप करने का उत्तम समय है।

जरूरी बात – ध्यान रहे अगर आप इसका जप किसी अलग समय पर करते है तो अपने मन में इसका जप करें अथार्थ अपने मुख से इसका उच्चारण करने के बजाय अपने मन में ही इसका जप करें।

गायत्री मंत्र के फायदे ?

दोस्तों, गायत्री मंत्र एक बहुत शक्तिशाली मंत्र है और अगर हम इसका जाप नियमित रूप से करते है तो हमको इसके निम्नलिखित लाभ हो सकते है – 

  • इसका जप करने से दुख और दरिद्रता का नाश होता है।
  • इसके जप से मन में शांति मिलती है और मन एकाग्र रहता है।
  • इसके जप से चेहरे पर एक अलग चमक आती है।
  • ऐसा माना जाता है की अगर आपको किसी कार्य में सफलता चाहिए है तो गायत्री मंत्र से आप उस कार्य में सफल होंगे।

गायत्री मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए ?

दोस्तों, अगर आप भी गायत्री मंत्र का जाप करते है तो आपको ध्यान रखना चाहिए की आप इसका जप 5 से 11 बार अवश्य करें और किसी मंदिर में जाए तब इसके जप आपको 12 बार करना चाहिए।

महिलाए क्यों नही कर सकती है गायत्री मंत्र का जाप ?

दोस्तों, आपको पता होगा की हिंदू धर्म में महिला को जब मासिक धर्म होता है तब कोई धार्मिक कार्य नही करना चाहिए यही वजह है की स्त्रियों को गायत्री मंत्र का जप करने से मना किया जाता है।

गायत्री मंत्र का जाप किस दिन करना चाहिए ?

मै आपको बता दूं की गायत्री माता का दिन शुक्रवार का होता है तथा अगर आप शुक्रवार के दिन गायत्री माता की उपासना के दौरान गायत्री मंत्र का जप करते है तो आपको इसके अच्छे प्रभाव देखने को मिलेंगे।

गायत्री मंत्र का अविष्कार किसने किया ?

विश्वामित्र द्वारा इस मंत्र का अविष्कार हुआ है। विश्वामित्र, प्रजापति के पुत्र कुश, कुश के पुत्र कुशनाभ, कुशनाभ के पुत्र राजागाधि थे और विश्वामित्र राजा गाधि के पुत्र थे।

Leave a Comment