Akshaya Tritiya 2022-कब है,अक्षय तृतीया का क्या महत्व है?

अक्षय तृतीया
3 मई 2022 मंगलवार
अक्षय तृतीया रोहिणी नक्षत्र में होगी…
गज केसरी योग
Renewable source of energy
वैशाख माह और रोहिणी नक्षत्र का वैध शुभ माना जाता है जो एक प्रकार से गजकेसरी योग जैसा फल देता है..

अक्षय तृतीया का लॉजिक

वेद में अक्षय तृतीया को अक्षय यज्ञ बोला है
अक्षय यज्ञ-वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया होती है, जिस दिन कृषि यज्ञ का आरम्भ होता है। इसके ठीक आधे वर्ष (१८३ दिन) बाद अक्षय नवमी कार्त्तिक शुक्ल तृतीया को होती है जब गो नवमी पूर्ण होती है। गो यज्ञ का स्वरूप है। यज्ञ चक्र ही उत्पादन का अक्षय स्रोत है जिसे आजकल अक्षय ऊर्जा (Renewable source of energy) कहते हैं। इस यज्ञ चक्र से बचा हुआ अन्न ही खाया जाता है जिससे यज्ञ चक्र और उसके द्वारा सभ्यता चलती रहे।

गीता, अध्याय ३-

सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरो वाच प्रजापतिः ।
अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् ॥१०॥

यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः ॥१३॥
एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः । अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति ॥१६॥

आरम्भ में ही प्रजापति ने यज्ञ के साथ प्रजा कीसृष्टि की तथा कहा कि अपनी इच्छा की हर वस्तु इसी से उत्पन्न करो।

यज्ञ चक्र से बचा हुआ अन्न (दृश्य या अदृश्य उत्पादन) खाना चाहिये, जिसए मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है। जो इस यज्ञ चक्र को नहीं चलाता है वह अघ (घ = ४ पुरुषार्थ नही करने वाला) केवल इन्द्रिय सुख के लिये व्यर्थ ही जीता है।

माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसा आदित्यानां अमृतस्य नाभिः।
प्रनु वोचं चिकितुषे जनाय मा गामनागामदितिं वधिष्ट॥ (ऋक् ८/१०१/१५)

गौ रुद्रों की माता, वसुओं की पुत्री, आदित्यों की बहन तथा अमृत की नाभि है। विवेकी (चिकितुषे) लोगों से कहता हूं कि अनागा (निरपराध, बाधा दूर करने वाली) तथा अदिति (सतत् सृष्टि चलाने वाली गौ को मत मारो।

आकाश में गौ किरण है जिससे जीवन चलता है। यह वसु (घने पिण्ड) से उत्पन्न होती है (सूर्य से तेज, पृथ्वी की वनस्पति आदि), अतः उसकी पुत्री है। उससे रुद्र (तेज का अनुभव, गति) आदि उत्पन्न होते हैं। तेज का क्षेत्र आदित्य है, वही निर्माण क्षेत्र भी है, अतः गौ आदित्य की बहन है। इन तीनों प्रकार से गौ सनातन यज्ञ अर्थात् अक्षय स्रोत है। अतः यह अमृत की नाभि है।
पृथ्वी रूपी गौ यज्ञ का स्थान है, ४ निर्माण स्रोत इसके ४ स्तन कहे गये हैं (भूमि, जल, वायु और जीव मण्डल)। इन वसुओं से यज्ञ चलता है।

गौ के यज्ञ से सभी क्रिया चल रही है, या मनुष्य के ११ रुद्र रूपी इन्द्रिय कम कर रही है। इससे सनातन सभ्यता या आदित्य चल रहा है। आज भी पूरे विश्व में मुख्यतः गौ आधारित खेती ही है। खेत में हल चलाना या खाद का मुख्य स्रोत है। गौ का दूध जीवन भर मनुष्य के स्वास्थ्य का आधार है।

अक्षय तृतीया का संबंध अन्नपूर्णा देवी का जन्म भी माना जाता है.
इसे भात का कटोरा संपत्ति धरती में माना गया है लक्ष्मी
शची के रूप में इ’द्र ओर कामधेनु गाय के रूप मे कामना पूर्ण करती हैं..इसलिए इस अक्षय धन का महत्व मंथन से है यह मंथन मक्खन के रूप में लक्ष्मी विष्णु या उस व्यक्ति के पास आती है जो उद्योगशील या कार्यरत होता है…लक्ष्मी के साथ-साथ अलक्ष्मी भी आएगी जैसे अनाज का छिलका दाना हम हटा कर ही खाते हैं या हम फल को उसका छिलका हटाकर खाते हैं इसी तरह बिषरूपी
अलक्ष्मी पड़ जाते हैं..

कृष्णा का अक्षय पात्र

महाभारत में भी अक्षय पात्र की बात कृष्ण ने कही गई है विष्णु लक्ष्मी के वरदान से जुड़ा हुआ है
गिरधर बैठे चंदन को तन लेप किए… अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) अक्षय लीला नवरंग गिरधर पहिरत चंदन
वैशाख माह आखातीज स्वयं सिद्ध मुहूर्त का सुख समृद्धि से सम्बन्ध वैशाख मास में मई का पूर्वार्ध विशाखा जिसमें की चार तारे तराजू की आकृति के बनाते हैं जो कि तुला का चिन्ह है (वीनस) जिसे वैशाख मास कहा जाता है यहां स्वर्ण वा देवस्थान का महत्व होता है इसे इंद्र का सिंहासन भी माना जाता है. गुरु बृहस्पति इंद्र को लक्ष्मी प्राप्ति के लिए पाताल से मंथन करके लाए थे..

श्रीदेवी ओर भू देवी के रूप मे देवताओं के मुख से आशीर्वाद, कृषि कार्य के लिए, उत्सव, प्रेम व सुख,निष्ठा, चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए, गूढ़ रहस्य, पराक्रम से धन, सद्गुण युक्त यह दिन सूर्य, चन्द ओर गुरु का फल अग्नि उर्जा बनकर लगातार धन का आगमन गतिशील या कार्य गतिशीलता प्रदान करता है..

तुला मे वृष का नवांश में पुष्कर नवांश भी होता है जो कि टिकाऊ पर या कार्यों में स्थिरता देता है इसलिए इस दिन का महत्व सबसे ज्यादा ब्रह्मांड में माना जाता है..
विवाह के लिए इसकी मान्यता क्यों है?

गुरु का महत्व हिंदू मैथोलॉजी में महत्वपूर्ण है भौतिक प्रगति आध्यात्मिक पुरुष का मिलन यह भी उत्पादन की ओर संकेत करता है जो कि धर्म के रूप में इस दिन का महत्व होता है विवाह एक दार्शनिक उपमा दी गई है इसमें ब्रम्हांड का निर्माण होता है इसलिए जब ऐ योग गजकेसरी योग के रूप में होता है यह सामाजिक व विवाह आदि के लिए उत्सवों का प्रवेश द्वार माना जाता है और विवाह के लिए शुक्र की तुला राशि में विवाह का कारक माना जाता है

यह विवाह के बाद की चुनौतियों से सामना करने में सहायता करता है इसलिए अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) में विवाह का शुभ फल प्राप्त होता है यह मंगल समारोह का समय होता है क्योंकि इंद्र व अग्नि सात फेरों का महत्व बताया है..

इस बार मंगलवार का दिन काल पुरुष में मेष और तुला राशि का मिलन के रूप में शुक्र और मंगल का मिलन के रूप में विवाह के लिए बहुत ही शुभ देने वाला होगा..

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परशुराम का जन्म

रेणुका के पुत्र के रूप में परशुराम और ब्रह्मा के पुत्र अक्षय कुमार का प्रकट उत्सव दिन मनाया जाता है परशुराम जी कृत युग की समाप्ति और त्रेता युग के प्रारंभ में में परसराम जी का 10 विष्णु के अवतार में मनुष्य रूप में हुआ था जो कि ब्राह्मण व्यवहार रूप से होकर छत्रिय कार्य कर किया..


Akshaya Tritiya (अक्षय तृतीया) के Benefit क्या है ,और क्या करें?

  1. प्रशासनिक कार्य जो भी है वह सब इस किस दिन करना चाहिए..
  2. लक्ष्य प्राप्ति हेतु और अपने को एकाग्र करने के जितने भी कार्य है इस दिन करना चाहिए
  3. सम्मान में पदक ग्रहण करने के समारोह भी इस दिन करने चाहिए.
  4. विभिन्न रावत व प्रीतिभोज का आयोजन करना चाहिए
  5. आठ बसुओ की पूजन करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है.
  6. रूप सज्जा,आभूषण पहनना, नवीन वस्त्र धारण करना इस दिन शुभ होता है.
  7. रोमांस या रति प्रसंग के लिए यह दिन अच्छा माना जाता है
  8. नया वाहन, गृह प्रवेश,जमीन जायजात,शेयर मार्केट, नए सौदा, नए सौदे क्रय- विक्रय दोनों ही इस दिन विशेष लाभकारी होते हैं..
  9. तपस्या,अनुष्ठान, संकल्प, यज्ञ आदि के समारोह बहुत अच्छे माने जाते हैं..
  10. गाय की पूजन,गाय के लिए चारे की व्यवस्था करना अनाज की व्यवस्था करना आदि शुभ कृत्य है.
  11. किस दिन वृक्षारोपण का विशेष पुण्य लाभ मिलता है..
    जिसमें बरगद,नीम,और पीपल तुलसी, बेल आदि पौधे शामिल है.
  12. गंगा स्नान, गंगाजल का दान, बद्री नारायण की पूजन (पट खुलने ) करना चाहिए.
  13. परशुराम की पूजन.. और अन्नपूर्णा पूजन करना चाहिए
  14. कन्याओं के विवाह में दान
    सिंगार का दान, लक्ष्मीकांता के फूल, भूमि पूजन आदि भी लाभकारी है.
  15. लाल नीला सुनहरी रंग के वस्त्र धारण करना भी शुभ माना जाता है.
    खरीदारी विशेष *
    अभिजीत मुहूर्त में वैसे तो पूरे दिन ही शुभ कार्य है
    शंख, मछली, चंदन, वेद पुस्तक, कटोरा पात्र धातु का, अनाज, कछुआ, कमल, मटका, हाथी घोड़ा हाथी की मूर्तियां, चांदी का कमल पुष्प, गाय धातु की, लक्ष्मी की मूर्ति, श्री यंत्र, गंगाजल, सिंगार का सामान, घर को सजाने वाले सामान, पूजा पाठ का सामान.. आदि लाना शुभ होता है..
    क्या नहीं करना चाहिए इस दिन?
    1.इस दिन यात्राओं को टालना अच्छा होता है..
  16. कूटनीतिज्ञ के काम नहीं करना चाहिए.
  17. आक्रामक गतिविधियों को एवाइट करना चाहिए.
  18. सेव, बाल कटवाना,नाखून काटना नहीं करना चाहिए नहीं तो आपको तनाव पैदा होगा.
  19. किसी तरह का गुस्सा और स्वच्छंदता के कार्यों को अवॉइड करें.
  20. दुर्घटना व मानसिक संताप में अपने समय को बर्बाद ना करें.
  21. भूमि का सम्मान करें… अपनी बहन बेटी और मां का अपमान ना करें.
  22. अपने दान का गुणगान ना करें.
    अंजना

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