हनुमान जी को क्यों कहा जाता है संकट मोचन | Hanuman Ji

रामदूत अतुलितबलधामा, अंजनीपुत्र पवनसुत नामा”, ये पंक्तियाँ

इसमें हनुमान जी को अतुलितबलधामा कहा गया, अतुलितबल धामामतलब अद्वितीय, बेजोड़, अनुपम, अपरिमित,अतुल्य,अपार परम शक्तिशाली जिसके समान पूरा विश्व में कोई ना हो। हनुमान जी की शक्ति का वर्णन नहीं किया जा सकता। जिसमें बहुत सी कथाओं मे हनुमान जी का जन्म हुआ है। अंजनी वानर के गर्भ में शिव जी का बीज वायुने रोपण किया था और केसरी की पत्नी थी। इसतरह पांच तत्वों का समावेश होता है।
पंच तत्व क्या है और शरीर में कैसे काम करते है। आज इन्ही तत्वों को समझेगे। ये पंच तत्व है क्रम अनुसार

1. पृथ्वी

2. जल

3. अग्नि,

4. वायु

5. आकाश।

पृथ्वी तत्व – ये वो तत्व है जिससे हमारा भौतिक शरीर बनता है। जिन तत्त्वों, धातुओं और अधातुओं से पृथ्वी (धरती) बनी उन्ही से हमारे भौतिक शरीर की भी सरंचना हुई है। यही कारण है कि हमारे शरीर लौह धातु खून में, कैल्शियम हड्डियों में, कार्बन फाइबर रूप में, नाइट्रोजन प्रोटीन रूप में और भी कितने ही तत्व है जो शरीर में पाए जाते है। और यही कारण है कि आयुर्वेद में शरीर की निरोग और बलशाली बनाने के लिए धातु की भस्मो का प्रयोग किया जाता है|

जल तत्व – जल तत्व से मतलब है तरलता से। जितने भी तरल तत्व जो शरीर में बह रहे है वो सब जल तत्व ही है। चाहे वो पानी हो, खून हो, वसा हो, शरीर मे बनने वाले सभी तरह के रस और एंजाइम। वो सभी जल तत्व ही है। जो शरीर की ऊर्जा और पोषण तत्वों को पूरे शरीर मे पहुचाते है। इसे आयुर्वेद में कफ के नाम से जाना जाता हैं। इस जल तत्व की मात्रा में संतुलन बिगड़ते ही शरीर भी बिगड़ कर बीमार बना देगा

अग्नि तत्व – अग्नि तत्व ऊर्जा, ऊष्मा, शक्ति और ताप का प्रतीक है। हमारे शरीर में जितनी भी गर्माहट है वो सब अग्नि तत्व ही है। यही अग्नि तत्व भोजन को पचाकर शरीर को निरोग रखता है। ये तत्व ही शरीर को बल और शक्ति वरदान करता है। इसे आयुर्वेद में पित्त के नाम से ज जाना जाता है। इस तत्व की ऊष्मा का भी एक स्तर होता है, उससे ऊपर या नीचे जाने से शरीर भी बीमार हो जाता है।

वायु तत्व – जितना भी प्राण है वो सब वायु तत्व है। जो हम सांस के रूप में हवा (ऑक्सीजन) लेते है, जिससे हमारा होना निश्चित है, जिससे हमारा जीवन है। वही वायु तत्व है। पतंजलि योग में जितने भी प्राण व उपप्राण बताये गए है वो सब वायु तत्व के कारण ही काम कर रहे है। इसको आयुर्वेद में वात के नाम से जानते है। इसका भी सन्तुलन बिगड़ने से शरीर का संतुलन बिगड़ कर शरीर बीमार पड़ जाता है।

आकाश तत्व – ये तत्व ऐसा जिसके बारे में कुछ साधक ही बता सकते है कि ये तत्व शरीर मे कैसे विद्यमान है और क्या काम करता है। ये आकाश तत्व अभौतिक रूप में मन है। जैसे आकाश अनन्त है वैसे ही मन की भी कोई सीमा नही है। जैसे आकाश आश्चर्यों से भरा पड़ा है वैसे ही मन के आश्चर्यो की कोई सीमा नही है। जैसे आकाश अनन्त ऊर्जाओं से भरा है वैसे ही मन की शक्ति की कोई सीमा नही है जो दबी या सोई हुई है। जैसे आकाश में कभी बादल, कभी धूल और कभी बिल्कुल साफ होता है वैसे ही मन में भी कभी ख़ुशी, कभी दुख और कभी तो बिल्कुल शांत रहता है। ये मन आकाश तत्व रूप है जो शरीर मे विद्यमान है।


इन पांच तत्वों को हनुमान जी का सुंदर कांड में वर्णित है। हनुमान जो कि जाति से वानर थे, वे वायु वेग से समुद्र को( जल तत्व) लांघकर लंका पहुंचे( आकाश तत्व) और वहां सीता की खोज की। लंका को जलाया (अग्नि तत्व) और सीता का संदेश लेकर लौट आए (वायु तत्व) । यह एक आम आदमी की जीत का कांड है, जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है। इसमें जीवन में सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी हैं। इसलिए पूरी रामायण में सुंदरकांड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता है..

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श्री हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयां हैं, ये उस क्रम में लिखी गई हैं जो ग्रह को ठीक करती है।

अगर आप सिर्फ हनुमान आराधना करते है तो आपको भीतरी शक्ति तो दे रही है लेकिन अगर आप इसके अर्थ में छिपे जिंदगी के सूत्र समझ लें तो आपको जीवन के हर क्षेत्र जीवन में क्या-क्या बदलाव ला सकते हैं….

  • गुरु *

हनुमान चालीसा की शुरुआत गुरु से हुई है…

श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि।
अर्थ – जीवन में गुरु नहीं है तो आपको कोई आगे नहीं बढ़ा सकता। गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं आज के दौर में गुरु हमारा कोई भी हो सकता है, बॉस भी। माता-पिता को पहला गुरु ही कहा गया है।
विवेकपूर्ण किया कार्य सफलताओं का कारण है।
समझने वाली बात ये है कि गुरु विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें।

शुक्र…
कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुंचित केसा।
अर्थ – आपके शरीर का रंग सोने चमकीला शुक्र खुद का आकर्षण है, सुवेष यानी अच्छे वस्त्र पहने हैं, कानों में कुंडल हैं और बाल संवरे हुए हैं।महिलाओं का सम्मान से। मां की तरह ममता हो तो आपके पास धनकी कमी नहीं हो सकती है।
अगर आप बहुत गुणवान भी हैं लेकिन अच्छे से नहीं रहते हैं तो ये बात आपके करियर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, रहन-सहन और सृजन की शक्ति का हमेशा ध्यान रखें।
बुध
बिद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर।
अर्थ – एक अच्छी डिग्री होना बहुत जरूरी है। लेकिन चालीसा कहती है सिर्फ डिग्री होने से आप सफल नहीं होंगे। विद्या हासिल करने के साथ आपको अपने गुणों को भी बढ़ाना पड़ेगा, बुद्धि में चतुराई भी लानी होगी। हनुमान में तीनों गुण हैं, वे सूर्य के शिष्य हैं, गुणी भी हैं और चतुर भी।
शनि
प्रभु चरित सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया।
अर्थजो आपकी प्रायोरिटी है, जो आपका काम है, उसे लेकर सिर्फ बोलने में नहीं, सुनने में भी आपको हर कार्य मे रसआना चाहिए। मेहनत और लगन से सभी कार्य होना बहुत जरूरी है। अगर आपके पास सुनने की कला नहीं है तो आप कभी अच्छे न्याय नहीं कर सकते हैं।
मंगल
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा।
अर्थ – कब, कहां, किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है, ये कला हनुमानजी से सीखी जा सकती है। शक्ति का प्रयोग भी समय पर करना चाहिए।
सीता से जब अशोक वाटिका में मिले तो उनके सामने छोटे वानर के आकार में मिले, वहीं जब लंका जलाई तो पर्वताकार रुप धर लिया। अक्सर लोग ये ही तय नहीं कर पाते हैं कि उन्हें कब किसके सामने कैसा दिखना है।

चंद्रतुम्हरो मंत्र बिभीसन माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना।

*अर्थ मन और मंत्र दोनों से किसी को भी बस मे किया जा सकता है।
हनुमान सीता की खोज में लंका गए तो वहां विभीषण से मिले। विभीषण को राम भक्त के रुप
विभीषण ने भी उस सलाह को माना और रावण के मरने के बाद वे राम द्वारा लंका के राजा बनाए गए। किसको, कहां, क्या सलाह देनी चाहिए, इसकी समझ बहुत आवश्यक है। सही समय पर सही इंसान को दी गई और हमें अपने मन पर नियंत्रण करना आना चाहिए।
सूर्य *
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही, जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।
अर्थ – आत्मविश्वास अगर आपमें खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है तो आप कोई भी मुश्किल से मुश्किल टॉस्क को आसानी से पूरा कर सकते हैं। सूर्य हमारे विशेष कार्य के लिए आत्मा को वह कार्य हेतु आती हैं औरआज के दौर में एक कमी आत्मविश्वास की कमी भी बहुत है। प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है। अपनेआप पर पूरा भरोसा रखे।
और हनुमान जी का सुंदरकांड पूजन हमे सभी कठिनाई से पार कर शुभता का संदेश देता है।
कुछ उपाय इस जंयती

कब पढ़ें हनुमान चालीसा :- कहते है हनुमान चालीसा को डर, भय, संकट या विपत्ति आने पर पढ़ने से सारे कष्‍ट दूर हो जाते हैं।

शनि का प्रभाव दूर करने में :- अगर किसी व्‍यक्ति पर शनि का संकट छाया है तो उस व्‍यक्ति का हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए। इसस उसके जीवन में शांति आती है।

बुरी शक्तियों को दूर भगाने में :- अगर किसी व्‍यक्ति को बुरी शक्तियां परेशान करती हैं तो उसे चालीसा पढ़ने से मुक्ति मिल जाती है।

क्षमा मांगने के लिए :- कोई भी अपराध करने पर अगर आप ग्‍लानि महसूस करते हैं और क्षमा मांगना चाहते है तो चालीसा का पाठ करें।

बाधा दूर करने में :- भगवान गणेश की तरह हनुमान जी भी कष्‍ट हरते हैं। ऐसे में हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी लाभ मिलता है।

तनाव मुक्ति :- हनुमान चालीसा पढ़ने से मन शांत होता है तनाव मुक्‍त हो जाता है।

सुरक्षित यात्रा :- सुरक्षित यात्रा के लिए हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ें। इससे लाभ मिलता है और भय नहीं लगता है।

इच्‍छाओं की पूर्ति के लिए :- किसी भी प्रकार की इच्‍छा होने पर भगवन हनुमान के चालीसा का पाठ पढ़ने से लाभ मिलता है।

दैवीय शक्ति :- हनुमान चालीसा के पाठ से दैवीय शक्ति मिलती है। इससे सुकुन मिलता है।

बुद्धि और बल :- हनुमान जी बुद्धि और बल के ईश्‍वर हैं। उनका पाठ करने से यह दोनों ही मिलते हैं।

व्‍यक्ति को सदबुद्धि देने में :- हनुमान चालीसा का पाठ करने से कुटिल से कुटिल व्‍यक्ति का मन भी अच्‍छा हो जाता है।
एकता बढ़ाने में :- हनुमान चालीसा का पाठ करने से एकता की भावना में विकास होता है।

नकरात्‍मकता दूर :- हनुमान चालीसा का पाठ करने से नकरात्‍मक भावनाएं दूर हो जाती है और मन में सकारात्‍मकता आती है।

अंजना ज्योतिषविद

    जय श्री राम

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